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Pilibhit News: गोमती के पुनरुद्धार के लिए 45 तालाबों का होगा संरक्षण, 56 करोड़ की परियोजना से बदलेगी सूरत

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गोमती नदी की सीमा में जेसीबी से कराई जा रही खोदाई। स्रोत ग्रामीण - फोटो : reasi news
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10 से 15 किलोमीटर के दायरे में चिह्नित स्थान पर होगी गोमती की खुदाई, संस्था की ओर से कराया जा रहा सर्वे
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पीलीभीत। अपने उद्गम के जिले में ही दम तोड़ रही आदि गंगा गोमती के पुनरुद्धार और अविरल धारा बहाने के लिए कवायद तेज हो गई है। गोमती की खुदाई, पौधरोपण के साथ ही नदी की सीमा में उसके एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले 45 तालाबों को भी संरक्षित किया जाएगा। इसकी सूची तैयार की गई है। स्थलीय निरीक्षण के बाद तालाबों की खुदाई, गहराई, किनारे सही करने और पौधारोपण कराया जाएगा। उधर, जलशक्ति मंत्रालय ने गोमती उद्गम स्थल पर कराए जाने वाले कार्यों के लिए 56 करोड़ की परियोजना पर अमल तेज कर दिया है।
माधोटांडा के पास फुलहर झील से गोमती का उद्गम माना जाता है। यहां पर तीन झीलें हैं। उद्गम स्थल पर रोजाना मां गोमती के आरती होती है। गोमती नदी अपने उद्गम के जिले में ही दम तोड़ रही है। उद्गम स्थल के आगे बढ़ने पर कई स्थानों पर इसका स्वरूप नाले के जैसा हो गया है। कई स्थानों पर नदी अतिक्रमण और गंदगी से कराह रही थी। अविरल धारा तो नजर ही नहीं आती। दम तोड़ रही गोमती के पुनर्जीवन के लिए सामाजिक संगठन, समाजसेवी, अफसर लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं।
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कुछ दिन पूर्व गोमती दर्शन पदयात्रा भी निकाली गई थी। संयोजक अनुराग पांडेय और अध्यक्ष श्वेता सिंह के साथ कई लोग पीलीभीत से पदयात्रा कर लखनऊ तक गए थे। पांच दिन पूर्व गोमती के पुनरुद्धार का कार्य शुरू किया गया है। वीबी जी राम जी ( मनरेगा) से गोमती की खुदाई कराई जा रही है। गोमती को गहरा किया जाएगा और पौधरोपण भी होगा।
जिले में गोमती का प्रवाह करीब 47 किमी में है। डीसी मनरेगा हेमंत यादव ने बताया कि चिह्नित स्थानों पर ही गोमती की खुदाई और गहरा किए जाने का काम होगा। पौधरोपण सभी जगहों पर कराया जाएगा। साथ ही गोमती से एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले पूरनपुर ब्लॉक क्षेत्र के 45 तालाबों को संरक्षित किया जाएगा। चिह्नित किए गए तालाबों का स्थलीय निरीक्षण कर देखा जाएगा कि पूर्व में इन पर कोई कार्य कराया तो नहीं गया। अगर कार्य नहीं मिला तो सभी तालाबों की खुदाई कार्य कराई जाएगी।
30 मई तक प्रस्तुत की जाएगी डीपीआर
जल शक्ति मंत्रालय की ओर से गोमती नदी और उद्गम स्थल के जीर्णोद्धार के लिए पिछले माह 56.88 करोड़ की परियोजना की डीपीआर को मंजूरी दी गई थी। मंत्रालय की ओर से अपनी सहयोगी संस्था वैफकोस को इस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शुक्रवार शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वैफकोस के ईडी प्रोजेक्ट ऑफिसर ने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर डीपीआर के विषय पर चर्चा की। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। इस दौरान 30 मई तक डीपीआर प्रस्तुत कराने की तिथि नीयत की गई। इसके साथ ही गोमती उद्गम स्थल तक पानी पहुंचाने को लेकर भी बनाई जाने वाली योजना पर भी चर्चा की गई। बैठक में डीएफओ भरत कुमार डीके के अलावा, डीडीओ, डीसी मनरेगा, सिंचाई विभाग के अधिकारी और गोमती ट्रस्ट के सदस्य निर्भय सिंह और राममूर्ति सिंह भी जुड़े।
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डिप्टी चीफ इंजीनियर एक सप्ताह से कर रहे सर्वे
वैफकोस की टीम एक सप्ताह से गोमती उद्गम और उसके आसपास के इलाकों में सर्वे कार्य में जुटी है। डिप्टी चीफ इंजीनियर दिनेश वर्मा और सर्वेयर लखवीर सिंह गोमती उद्गम स्थल की वास्तविक स्थिति के अलावा पूरनपुर वाया माधोटांडा खटीमा मार्ग की मैपिंग, कल्वरट एवं माधोटांडा के नेचुरल, बरसाती एवं सीवेज ड्रेनों सहित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि का सर्वे कर रहे हैं। संवाद

गोमती नदी की सीमा में जेसीबी से कराई जा रही खोदाई। स्रोत ग्रामीण- फोटो : reasi news

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