18 पीबीटीपी 1, 2
शहर की हवा में तेजी से जहर घोल रहा है ‘जाम’
जाम के दौरान वाहनों से निकला धुआं बन रहा है बीमारियों का सबब
सड़कें संकरी होने से शहर में रोजाना कई स्थानों पर लगता है जाम
पीएम 10 नार्मल से पांच गुना अधिक तो पीएम 2.5 सात गुना हुआ ज्यादा
सुनील यादव
पीलीभीत। इन दिनों शहर एक नई महामारी से जूझ रहा है। हालांकि यह कोई संक्रामक बीमारी नहीं है और न ही खतरनाक वायरस का आतंक। फिर भी इसने ढाई लाख की आबादी का जीना दुश्वार कर दिया है। यह महामारी है ट्रैफिक जाम। जाम यातायात खराब व्यवस्था की परिणीत है, लेकिन जाम में फंसे जो वाहन जहरीला धुआं उगल रहे हैं, उससे शहर का वातावरण प्रदूषित होता जा रहा है। इसके चलते प्रदूषण के जिम्मेदार पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा भी बढ़ती जा रही है। डाक्टरों के मुताबिक लगातार जहरीले धुएं के संपर्क में रहने से लोग डिप्रेशन से लेकर कैंसर जैसी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।
00
आइए कहीं से भी, जाम से तो जूझना ही पड़ेगा साहब
जैसे-जैसे शहर की आबादी बढ़ती गई, जाम की समस्या भी बढ़ती गई। शहर में यदि असम हाईवे की ओर से इंट्री करें तो मंडी समिति रोड पर मंडी गेट और रेलवे क्रॉसिंग पर वाहनों को जाम से जूझना लाजिमी है। ईदगाह रेलवे क्रॉसिंग से आने पर लकड़ी मंडी और जेपी रोड पर दुकानों के बाहर रखा सामान जाम का सबब बन रहा है। माधोटांडा रोड से प्रवेश करने पर गौहनिया रेलवे क्रॉसिंग से लेकर चौराहा तक सड़क किनारे व्यापारियों ने कब्जा जमा रखा है। शहर के भीतर सड़कों के हाल पर गौर करें तो स्टेशन रोड, स्टेडियम रोड, जेपी रोड पर लगने जाम का कारण सड़कों के किनारे रखा गया सामान ही है। व्यापारी सड़कों को अपनी पैतृक संपत्ति मानकर आधी-आधी सड़कों पर रोजाना ही सामान सजाते देखे जा सकते हैं और यही सड़कों पर रखा गया सामान दिन में कई-कई बार जाम का सबब बन रहा है।
00
जाम में फंसे वाहन उगल रहे जहरीला धुआं
जाम में फंसे वाहन वायु प्रदूषण का बड़ा कारक माने जाते हैं। शहर में स्टेडियम रोड के अलावा स्टेशन रोड पर थाना सुनगढ़ी तिराहे से ड्रमंडगंज चौराहे तक और पूरे जेपी रोड तक एक दिन में करीब 20 से 25 बार जाम लगना आम बात है। बात जाम तक ही सीमित नहीं है। इस जाम में फंसे सैकड़ों वाहन जो जहरीला धुआं उगल रहे हैं उससे जाम में फंसे लोग ही नहीं बल्कि वह व्यापारी भी प्रभावित होते हैं, जिनकी सड़कों के किनारे दुकानें हैं।
00
रोजाना ही बढ़ता जा रहा प्रदूषण का सूचकांक
करीब ढाई लाख की आबादी वाले शहर में वाहनों से निकल रहा धुआं शहर के वातावरण में लंबे अरसे से जहर घोल रहा है। जिला विज्ञान क्लब के पूर्व समन्वयक और समाधान विकास समिति विपनेट क्लब के वर्तमान जिला समन्वयक लक्ष्मीकांत शर्मा बताते हैं कि शहर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण के चलते जिम्मेदार पीएम 10 और पीएम 2.5 (वायु गुणवत्ता सूचकांक) की मात्रा भी बढ़ती जा रही है। पीएम 10 का सामान्य लेवल 20-50 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) होना चाहिए, लेकिन अपने शहर में पीएम 10 का लेवल 105-250 है। वहीं पीएम 2.5 का नार्मल लेवल 10-25 एमजीसीएम होता है, लेकिन इन दिनों यह लेवल 28-185 के करीब पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि पीएम 10 का लेवल बढ़ने पर मृत्यु का खतरा दो प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
00
18 पीबीटीपी 3
आने वाली पीढ़ी के लिए खतरे की घंटी
सड़कों पर धूल, ट्रक और दोपहिया वाहनों से कार की अपेक्षा वायु प्रदूषण ज्यादा होता है। सड़कों पर धूल के कारण 35 प्रतिशत वायु प्रदूषण होता है, जबकि वाहनों से 25 से 36 प्रतिशत तक वायु प्रदूषण होता है। शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर लगातार बढ़ रहा है। जो आने वाली पीढ़ी के लिए बड़े खतरे की घंटी है।
- लक्ष्मीकांत शर्मा, समन्वयक, समाधान विकास समिति विपनेट क्लब
00
18 पीबीटीपी 4
जहरीला धुआं गंभीर बीमारियों का बनता है सबब
ज्यादातर वाहनों से निकलने वाले धुएं में नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाईआक्साइड और कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ शामिल होते हैं। वाहनों का जहरीला धुआं सांसों के जरिए फेफड़ों तक पहुंचता है। इसके लगातार संपर्क में रहने से श्वांस संबंधी बीमारियों से लेकर फेफड़ों का कैंसर तक हो सकता है।
- डॉ. सीबी चौरसिया, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल
00
शहर में पर्यावरण प्रदूषण की स्थिति
वायु गुणवत्ता सूचकांक /नार्मल लेवल/ शहर का लेवल
पीएम 10 /20-50/ 105-250 एमजीसीएम
पीएम 2.5 /10-25/ 28-185 एमजीसीएम