पीलीभीत। टाइगर रिजर्व के बाद अब जिले में टाइगर सफारी बनाने की कवायद शुरू गई है। इस पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। हालांकि इसके लिए अभी शासन से स्वीकृति नहीं मिली है लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इसका खाका खींचना शुरू कर दिया है।
जंगल से बाहर निकलकर हमलावर हो रहे बाघ एवं अन्य वन्यजीवों को पकड़ने के बाद सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिले में टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में टाइगर सफारी बनाने की तैयारी की जा रही है। पिछले दिनों वनसंरक्षक ने इसके लिए बरूआ कुठारा में एक हजार हेक्टेअर जमीन को चिन्हित किया है। जमीन मिलने के बाद अब इस पर कराए जाने वाले कार्य व व्यवस्थाओं का खाका खींचा जाने लगा है। यदि प्रस्तावित योजना के अनुसार टाइगर सफारी बनकर तैयार हो गया तो यह किसी ओपन चिड़िया घर से कम नहीं होगा। एक हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में बाघों के साथ करीब 300 वन्यजीव रखे जाएंगे। साथ ही पक्षियों की भी कई प्रजातियों को इसमें बसाने का प्रयास किया जाएगा।
टाइगर सफारी की सुरक्षा के लिए आठ वाच टॉवर बनाए जाएंगे। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी लगाकर कंट्रोल रूम के माध्यम से निगरानी की जाएगी। टाइगर सफारी में सबसे ज्यादा फोकस रेस्क्यू सेंटर पर दिया जा रहा है। यह एक तरह का पशु अस्पताल होगा। इसमें घायल पशुओं के इलाज की सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ साथ उन्हें कुछ दिन रखने की भी व्यवस्था की जाएगी।
त्रिस्तरीय होगी सुरक्षा व्यवस्था
टाइगर सफारी के चारों ओर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होगी। इसमें सोलर फेसिंग के साथ कुछ दूरी पर कंटीले तारों की बाड़ होगी। इसके बाद काफी चौड़ाई में खांई खोदी जाएगी। ऐसे में यदि कोई बाघ या वन्यजीव किसी कारण वश एक स्तर को पार कर भी लेता है तो दूसरे से बाहर निकलने से पहले ही उसे पकड़ा जा सकेगा।
100 सीटों का आडीटोरियम
पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां प्रशासनिक भवन के साथ पार्किंग व्यवस्था व रिसेप्शन काउंटर बनेगा। इसके अलावा 100 सीटों का आडिटोरियम, दैनिक उपयोग की वस्तुओं की शॉप भी रहेंगे।
पीलीभीत में टाइगर सफारी बनाने की कवायद चल रही है। इस पर लगभग 300 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
विनोद कृष्ण सिंह, वन संरक्षक