मझोला। पिछले आठ सालों से बंद पड़ी मझोला चीनी मिल के लिस्टेड कर्मकार और मृतक आश्रित, न्यायालय में विचाराधीन कर्मचारियों के लगभग 70 परिवार मिल की आवासीय कॉलोनी में रहते है। इनका दो वर्ष पूर्व पानी बंद कर दिया गया और 31 जनवरी को पावर कॉरपोरेशन का बकाया बताकर बिजली बंद कर दी गई। जिससे यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। कॉलोनी के लोग भी बिजली, पानी के बिना काफी परेशान है। शनिवार को कॉलोनी के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर नारेबाजी की।
वर्ष 2009-10 में चीनी मिल बंद हो गई थी। मिल बंद होने के बाद भी कर्मचारियों के 70 परिवार आवासीय कॉलोनी में रहते है। मिल प्रशासन ने दो वर्ष पूर्व इन परिवारों की पानी की सप्लाई बंद करा दी थी। तब नगर पंचायत के वार्ड तीन और आठ में कॉलोनी आने के वजह से पंचायत प्रशासन ने इंडिया मार्का हैंडपंप लगवा दिए थे। इन हैंड पंपों से दूषित पानी आने के कारण लोग बीमार पड़ने लगे और बीमारियां फैलने लगी। लोगों ने इन हैंडपंपों का पानी पीना बंद कर दिया और खुद ही वैकल्पिक व्यवस्था कर ली। मिल प्रशासन की प्रताड़ना यहीं नहीं रुकी, उसने 31 जनवरी को पावर कॉरपोरेशन का बकाया बताते हुए कॉलोनी की बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी।
बच्चों के भविष्य को लेकर गरजे कर्मचारी
कर्मचारियों ने कॉलोनी की बिजली और पानी चालू करने के लिए शनिवार को कॉलोनी में ही एकत्र होकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मिल प्रशासन ने कर्मचारियों को गुमराह कर बेरोजगार कर दिया। सात फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। बिजली बंदकर मिल प्रशासन ने बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलने का काम भी किया है। प्रदर्शन करने वालों में हर नारायण शुक्ला, राम नरेश यादव, हर प्रसाद, अतुल शुक्ला, सुरेश वर्मा शामिल रहे।
मिल प्रशासन की बढ़ती जा रही ज्यादती
मिल मजदूर संघ के उपाध्यक्ष सत्य प्रकाश शुक्ला ने बताया कि क्षेत्रीय विधायक के हस्तक्षेप पर कॉलोनी में बच्चों की पढ़ाई के लिए सुबह शाम तीन-तीन घंटे सप्लाई दी जा रही थी, लेकिन मिल प्रशासन ने अब वह भी बंद कर दी है। चहारदीवारी टूटी होने के कारण आवासों में जंगली जानवरों और चोरी की खतरा बना रहता है।