पीलीभीत। गन्ना न देकर भेली देने की कहावत वन विभाग पर सटीक बैठ रही है। करीब एक माह पूर्व खेत में घेरे जाने पर फसल नुकसान का मुआवजा देने से मना कर दिया था और अब उसी बाघ को पकड़ने के लिए हजारों रुपये रोज खर्च किए जा रहे हैं। 21 दिन में 30 लाख से अधिक खर्च होने का अनुमान है इसके बाद भी परिणाम शून्य है। वनकटी केे जंगल से निकलकर बाघ करीब डेढ़ माह पूर्व मेवातपुर गांव पहुंचा था। इसके बाद वह टंडोला और मोबिनगंज के पास देखा गया था। इस दौरान वनविभाग की टीम ने उसे गन्ने के खेत में घेर लिया। इसके बाद उसे ट्रैंक्यूलाइज करने के लिए हाथी मंगवाए गए लेकिन किसान ने गन्ने की फसल को होने वाले नुकसान के बदले मुआवजे की मांग कर दी जिसे वनविभाग ने मना कर दिया। करीब दो एकड़ गन्ने के बदले कुछ हजार रुपये का भुगतान वनविभाग को करना पड़ता जिसे नहीं किया गया। इसके बाद बाघ बेकाबू हो गया और देवहा नदी पार कर तीन लोगों की जान तक उसने ले ली। तीनों परिवारों को 15 लाख का मुआवजा देने के साथ ही वनविभाग पिछले 21 दिन से उसे पकड़ने में जुटा है। इसके लिए चार हाथियों के अलावा करीब एक दर्जन से अधिक गाड़ियां, स्थानीय और बाहर का मिलाकर करीब 80 लोगों का स्टाफ लगा हुआ है। हाथियों के चारे, गाड़ियों का डीजल और बाहर से आए स्टाफ के खाने पर हजारों रुपये रोज खर्च हो रहे हैं। यह खर्च अब तक 15 लाख से अधिक हो चुका है। कुल मिलाकर कुछ हजार खर्च न करने वाला वनविभाग अब तक लगभग 30 लाख खर्च कर चुका है और बाघ पकड़ से बाहर है। अभी अभियान कितने दिन और चलेगा यह कहना मुश्किल है। अधिकारी भी इस पर कुछ बोलने से बच रहे हैं।
अब तक मंजूर नहीं हुआ फसल मुआवजे का प्रस्ताव
बाघ द्वारा देवहा नदी पार करने के बाद चार दिन में तीन लोगों की जान लेने के बाद मुख्यमंत्री पीलीभीत पहुंचे थे। इस दौरान वनमंत्री ने फसल नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिलाने का प्रस्ताव भेजने की घोषणा की थी। डीएम के माध्यम से प्रस्ताव शासन को भेजा भी गया लेकिन अब तक प्रस्ताव स्वीकार नहीं हुआ है। इसके स्वीकृत न होने से यदि अभियान के दौरान बाघ किसी के खेत में पहुंच गया तो फसल के नुकसान की आशंका के चलते उसे पकड़ने में फिर दिक्कत हो सकती है।
विभागीय कामकाज भी चौपट
बाघ को पकड़ने के अभियान में टाइगर रिजर्व के साथ सामाजिक वानिकी का स्टाफ भी लगाया गया है साथ ही बदायूं व शाहजहांपुर का भी स्टाफ लगा है। सर्च अभियान में लगे होने से अधिकारी कर्मचारियों के विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।