विभागीय लापरवाही के चलते इस बार जिले में गेहूं की सरकारी खरीद मात्र 30 प्रतिशत ही हुई है। अब बाजार भाव तेज होने के कारण खरीद का काम लगभग बंद हो चुका है। ऐसे में 15 जून तक लक्ष्य पूरा मुश्किल ही नहीं असंभव लग रहा है।
जिले में गेहूं की बंपर पैदावार को देखते हुए शासन ने इस बार 2.13 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया था, लेकिन प्रारंभ से ही विभागीय धींगा मस्ती के चलते गेहूं खरीद में गति नहीं आ पाई। दरअसल, अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इस बार बीज के नाम पर जमकर गेहूं खरीदा गया, जिसके चलते बाजार भाव अच्छा रहा। इसका त्वरित लाभ किसानों को मिला है, लेकिन बिना मानक के पैदा हुए गेहूं को बीज निर्माता बीज के रूप में किसानों को उपलब्ध कराएंगे, जिससे उनको अगले सीजन में नुकसान होने के आसार हैं। बीज के नाम पर हुई खरीद के चलते सरकारी क्रय केंद्र सूने पड़े रहे। उच्चाधिकारियों की सख्ती के बाद कुछ समय के लिए बीज खरीद पर मौखिक तौर पर रोक लगवाकर सरकारी खरीद का प्रयास किया गया। इससे जिले में 2.13 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 63 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा सका, जो लक्ष्य का लगभग 30 प्रतिशत है। सरकारी खरीद के लक्ष्य पूरा न होने चलते इस बार शासन के समक्ष खाद्य सुरक्षा में वितरण के लिए गेहूं की किल्लत हो सकती है। इस बावत जानकारी करने पर डिप्टी आरएमओ एसके यादव ने बताया कि बाजार भाव तेज रहने के बाद सरकारी खरीद प्रभावित हुई है। अभी 15 जून तक खरीद जारी है जिससे खरीद की प्रतिशत बढ़ सकता है।