क्रय केंद्रों पर सन्नाटा, घर-घर जाने पर भी नहीं मिल रहा गेहूं
काफी प्रयास करने के बाद भी जिले में गेहूं की सरकारी खरीद नहीं हो पा रही है। एक से 20 अप्रैल तक जिले में 12 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई है, जो कुल लक्ष्य 372 लाख मीट्रिक टन का 3.22 प्रतिशत है। घर-घर जाने के बाद भी गेहूं नहीं मिल रहा है। खरीद न होने के कारण अधिकारी कर्मचारियों को कार्रवाई होने का डर सताने लगा है।
इस बार जिले में गेहूं की बम्पर पैदावार हुई है। इसको देखते हुए शासन ने इस बार जिले का लक्ष्य भी गत वर्ष से बढ़ाकर 372 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। गेहूं खरीद के लिए जिले में 89 क्रय केंद्र खोले गए थे जिनकी संख्या तीन दिन पूर्व बढ़ाकर 106 कर दी गई। आरएफसी से लेकर स्थानीय अधिकारी भी क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर खरीद व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी क्रय केंद्र प्रभारी एवं हैंडलिंग ठेकेदार गांव-गांव घूमकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं इसके बाद भी सारे प्रयास विफल होते दिख रहे हैं। हालांकि सरकारी खरीद न होने से किसानों को कोई विशेष नुकसान नहीं हो रहा है। आढ़तों एवं बीज व्यापारियों के हाथों गेहूं बिक्री कर उन्हें अच्छा दाम मिल रहा है। बृहस्पतिवार को मंडी समिति के क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा। एक दो सेंटरों पर ही नाम मात्र की खरीद हुई। कमोवेश यही स्थिति देहात क्षेत्र में लगे क्रय केंद्रों की भी है। पहली अप्रैल से 20 अप्रैल तक जिले में मात्र 12 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है जो कुल लक्ष्य का 3.22 प्रतिशत है।
क्रय एजेंसियों की स्थिति (मीट्रिक टन)
क्रय एजेंसी लक्ष्य खरीद
खाद्य विभाग 95000 1300
पीसीएफ 65000 3000
पीसीयू 80000 2330
यूपी एग्रो 18000 290
एसएफसी 42000 1890
एनसीसीएफ 28000 1715
क. कल्याण निगम 28000 245
नेफेड 16000 285
एफसीआई -- 950
कुल योग 372000 12005