पीलीभीत। अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (डीएचईआइओ) धीरेंद्र सिंह पर साढ़े तीन साल बाद भी विभाग शिकंजा नहीं कस सका है। न तो अब तक उनसे सरकारी आवास खाली कराया गया है और न ही सरकारी गाड़ी वापस ली जा सकी है। खास बात यह है कि खुद विशेष सचिव मानवेंद्र सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए महानिदेशक परिवार कल्याण को पत्र भी लिखा था। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से इस मामले में लापरवाही को लेकर नाराजगी जताते हुए कई सवालों के जवाब भी मांगे थे, लेकिन आज तक जवाब नहीं दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग में डीएचईआइओ के पद पर तैनात धीरेंद्र सिंह का 2015 में रामपुर स्थानांतरण कर दिया गया था। उन्हें तबादला आदेश मिलने के बाद पीलीभीत से रिलीव भी कर दिया गया। इसके बावजूद धीरेंद्र सिंह ने जिला अस्पताल परिसर में मिला सरकारी आवास नहीं छोड़ा, साथ ही सात साल पूर्व मिली सरकारी गाड़ी पर भी कब्जा जमाए हैं। उनको लगातार इसके लिए निर्देश दिए गए, लेकिन कोई पालन नहीं हो सका। इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सात मई 2016 को धीरेंद्र सिंह को निलंबित कर एडी मुरादाबाद कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। हालांकि धीरेंद्र सिंह ने वहां ज्वाइन नहीं किया। इसका संज्ञान लेकर एडी मुरादाबाद डॉ. ज्ञान सिंह ने उनका वेतन रोकने के आदेश कर दिए। यह भी कहा गया कि धीरेंद्र सिंह से पीलीभीत का सरकारी आवास खाली कराया जाए और सरकारी गाड़ी भी वापस ली जाए। इस पर अधिकारियों ने हामी तो भरी लेकिन कार्रवाई नहीं की। इधर, पूर्व में विशेष सचिव मानवेंद्र सिंह ने परिवार कल्याण के महानिदेशक को एक पत्र लिखा। इसमें आवास और सरकारी वाहन आवंटित करने वाले अधिकारी का जवाब तलब कर उन पर कार्रवाई को लिखा है। इसकी जिम्मेदारी सीएमओ को दी गई लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
सात लाख से अधिक हो चुका है किराया
नियमानुसार स्थानांतरण होने के एक महीने के अंदर सरकारी आवास खाली कर देना चाहिए। खाली नहीं करने पर तीसरे माह से मानक का तीन गुना किराये की धनराशि वसूले जाने का प्रावधान है। एक महीने का छह हजार रुपये के करीब किराया बैठता है। इस हिसाब से देखा जाए तो टाइप-4 के जिस सरकारी आवास पर धीरेंद्र का कब्जा है, उसका अब तक सात लाख से अधिक का किराया बकाया हो चुका है। इसकी वसूली तो दूर अफसर निलंबित स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र की जानकारी तक होने से इंकार कर रहे हैं।
बर्खास्त डीपीएम ने भी कब्जा रखा सरकारी आवास
एनएचएम के पूर्व डीपीएम सर्वेश कुमार की करीब सात माह पूर्व शासन स्तर से सभी सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। उसके बाद भी बर्खास्त डीपीएम सर्वेश कुमार ने अभी तक सरकारी आवास खाली नहीं किया है। सख्ती का दावा करने वाले अफसरों का आदेश ताक पर है।
निलंबन की कार्रवाई से इसका कोई मतलब नहीं। मैं सरकारी आवास में नियमानुसार रह रहा हूं। विभागीय अधिकारी होने के चलते मुझे आवास आवंटित किया गया था। सीएमओ से इसको लेकर पत्राचार चल रहा है। - धीरेंद्र सिंह, निलंबित डीएचईआइओ
शासन स्तर पर इस मामले को लेकर पत्राचार चल रहा है। निलंबित स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र सिंह और बर्खास्त डीपीएम सर्वेश कुमार को सरकारी आवास तत्कालीन सीएमओ ने आवंटित किए थे। सीएमओ कार्यालय से सरकारी आवास खाली कराने को लेकर कोई पत्र भी नहीं भेजा गया है। - डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस, महिला अस्पताल
दोनों ही सरकारी आवास महिला सीएमएस के अधीन हैं। वही इन आवासों को खाली कराएंगी। इससे हमारा कोई लेना देना नहीं है। मामला भी मेरे कार्यकाल का नहीं है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ