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अजब-गजब: पालिका के सर्वे में मात्र 24 आवारा पशु

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पीलीभीत। शहर में सड़कों पर आवारा पशुओं की दौड़ या उनके इधर-उधर बैठे रहने को देखकर यह नहीं कहा जा सकता है कि इतने बड़े शहर में मात्र 24 आवारा पशु हीं होंगे। जबकि नगर पालिका का सर्वे है, जो बता रहा है कि नगर में केवल 24 आवारा पशु ही पाए गए हैं, ऐसे में कोई भी सहज अनुमान लगा सकता है कि यह सर्वे सही नहीं है न ही इस पर यकीन किया जा सकता है। ऐसे में पालिका द्वारा कराए गए सर्वे की खिल्ली उड़ रही है। ऐसे में पालिका प्रशासन ने शासन के निर्देश के बाद आवारा पशुओं के सर्वे और उन्हें पकड़कर आश्रय गृह में रखने के लापरवाही और उदासीनता ही दिखाई है।
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शासन ने शहर कस्बों में घूम रहे आवारा पशुओं और पशु क्रूरता पर अंकुश लगाने के लिए कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत शेल्टर होम बनाने के आदेश दिए हैं। शहर को आवारा पशुओं से निजात दिलाने को शासन ने 1.65 करोड़ रुपये से शेल्टर होम बनाने को मंजूरी भी दे दी है। इधर शासन ने स्थायी शेल्टर होम न बनने तक शहर में पालतू और आवारा पशुओं का सर्वे कर आवारा पशुओं को अस्थायी शेल्टर बनाकर उसमें रखने के आदेश भी दिए हैं। शासन के निर्देशानुसार नगर पालिका प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए शहर में बंद पड़े स्लॉटर हाउस के एक टीन शेड में रंगरोगन कर उसे अस्थायी शेल्टर होम बना दिया। साथ ही शहर के सभी 27 वार्डों में पालतू और आवारा पशुओं का दो-दो कर्मचारियों के माध्यम से सर्वे भी शुरू कराया गया। पालिका प्रशासन के मुताबिक सर्वे में 2370 पालतू और मात्र 24 आवारा पशु पाए गए। फिलहाल पालिका के इस सर्वे पर यकीन करना मुश्किल होगा। वजह यह है कि यदि अकेेले गौहनिया चौराहा या उसके आसपास एरिया में निगाह डाले तो 15-20 आवारा पशु इसी क्षेत्र में देखे जा सकते हैं। इधर पालिका प्रशासन ने 18 जनवरी से आवारा पशुओं को पकड़कर शेल्टर होम भेजने की बात कही थी, लेकिन तय तिथि के दो दिन बाद भी पालिका प्रशासन एक भी आवारा पशु को अपने शिकंजे में नहीं ले सकी। खास बात यह है कि इस कार्य को लेकर पालिका प्रशासन ने कोई ठोस रणनीति ही नही बनाई है। ऐसे में शहरवासियों को आवारा पशुओं से निजात मिल सकेगी, इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। इस संबंध में पालिका के सफाई एवं खाद्य निरीक्षक आबिद अली ने बताया कि सर्वे कार्य में देरी के चलते आवारा पशुओं को अभी नहीं पकड़ा जा सका है। जल्द ही आवारा पशुओं को पकड़कर शेल्टर होम भेजा जाएगा।
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