पीलीभीत। जिला अस्पताल में शासन के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। अस्पताल परिसर में ही सरकारी एंबुलेंस सेवा को प्राइवेट एंबुलेंस संचालक पलीता लगा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की मिलीभगत कहें या लापरवाही, मरीजों को प्राइवेट एंबुलेंस में लाया और ले जाया जाता है। इसके बदले में उनसे मनमाना किराया वसूला जाता है। जिला अस्पताल में रेफर मरीजों की छीना-छपटी को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन नए और पुराने मरीजों की ओपीडी की संख्या करीब एक हजार के आसपास रहती है। इनमें दुर्घटनाओं, मारपीट में गंभीर घायल व गंभीर बीमारियों के मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है। दुर्घटना के मरीजों को जिला अस्पताल लाने के लिए तो 108 एबुलेंस सेवा है। मरीज की हालत गंभीर होने पर चिकित्सक उन्हें प्राइवेट अस्पताल या बरेली के लिए रेफर करते हैं। ऐसे मरीजों को पहुंचाने के लिए प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों ने जिला अस्पताल को अड्डा बना लिया है। निजी एंबुलेंस चालक मरीजों के तीमारदारों से मनमाना किराया वसूलते हैं। कुछ दिन पहले एक मरीज को प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने को लेकर दो एंबुलेंस संचालक आपस में भिड़ गए थे। ऐसे में यह कहना गलता नहीं होगा कि अगर अस्पताल प्रशासन ने जल्द इस पर अंकुश नहीं लगाया तो किसी दिन कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है।
...तो मिलीभगत से चल रहा है खेल
जानकारी के मुताबिक जैसे किसी मरीज को बाहर रेफर होने की जरूरत पड़ती है तो अस्पताल के ही कुछ कर्मचारी मरीजों के परिजनों को समझा बुझाकर उन्हें प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों के हवाले कर देते हैं। इसके बाद फिर एंबुलेंस चालक मरीजों के परिजनों से मनमाना किराया वसूलते है। 90 किलोमीटर तक के सफर के लिए दो हजार जबकि इससे अधिक दूरी और ले जाने के लिए 10 से 12 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से पैसा वसूला जाता है।
जिला अस्पताल परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों को पूर्व में दिए गए थे। बावजूद इसके प्राइवेट एंबुलेंस अगर अस्पताल परिसर में खड़ी हो रही हैं तो इसे दिखवाया जाएगा। - डॉॅ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस