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दिव्यांगों के प्रमाण पत्र बनाने में स्वास्थ्य विभाग ने ही अटकाया रोड़ा

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पीलीभीत। जिले के सात सौ से अधिक दिव्यांगजनों को स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते तीन साल बाद भी दिव्यांगता प्रमाण नहीं मिल सके हैं, जबकि एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) उनके आवेदनों की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय भेज चुका है। कई बार रिमाइंडर भी भेजा गया। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर नहीं चेेत रहे। नतीजतन दिव्यांगजन एनआईसी और सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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शासन-प्रशासन दिव्यांगजनों को सुविधाएं और सहूलियतें देने का दावा करता रहा है। विभिन्न योजनाओं से दिव्यांगों को लाभान्वित करने के लिए कैंप भी लगाए जाते हैं, लेकिन इन योजनाओं का लाभ पाने के लिए सबसे आवश्यक दस्तावेज दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाना दिव्यांगों के लिए चुनौती बना हुआ है। 717 दिव्यांग आवेदन करने के तीन साल बाद भी दिव्यांगजन प्रमाण पत्र पाने के लिए भटक रहे हैं। एनआईसी के कर्मचारियों ने जनसेवा केंद्रों से मिले इन आवेदनों की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय को भेज दी है। कार्रवाई की शुरूआत न होने पर कई बार रिमाइंडर भी भेजे गए। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बेसुध है। सीएमओ दफ्तर में कार्रवाई सालों से लटकी हुई है। इसका कोई समाधान नहीं हो सका है। अब हर कोई एक दूसरे पर लापरवाही टाल रहा है।
एनआईसी पहुंचे दिव्यांग दीपेंद्र और सुशील दोनों लोग एक-एक पांव से दिव्यांग है। उन्होंने बताया कि करीब एक साल पूर्व एक साथ ही पूरनपुर के जनसेवा केंद्र से आवेदन किया था। लेकिन आज तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया।
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जनसेवा केंद्रों पर होती है कहासुनी
ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद दिव्यंाग प्रमाण पत्र के लिए जनसेवा केंद्रों के माध्यम से भी आवेदन किए जा रहे हैं। नगरीय क्षेत्र में करीब सौ और ग्रामीण क्षेत्रों में पांच सौ से अधिक केंद्र खुले हैं। केंद्र संचालक राजेंद्र, सुरजीत का कहना है कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के लंबे समय बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर आये दिन केंद्र पर दिव्यांगजनों से कहासुनी होती है। कई बार तो मारपीट की नौबत तक आ चुकी है। बावजूद दिव्यांगजन जनसेवा केंद्र से लेकर एनआईसी और सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर है।
हो रहा फर्जीवाड़ा, कर रहे नजर अंदाज
फर्जीवाड़ा करने वाले कोई न कोई जुगाड़ तकनीक खोज ही लेते है। फर्जीवाड़ा पर अंकुश लगाने के लिए दिव्यांगजनों के लिए यूआईडीकार्ड जारी किए जा रहे है। बस और ट्रेन में यात्रा का मुफ्त लाभ लेने के लिए इसमें भी फर्जीवाड़ा हो रहा है। सूत्रों की मानें तो चिकित्सकों से सांठगांठ कर प्राइवेट तो दूर सरकारी कर्मियों ने तब बस और ट्रेन में मुफ्त यात्रा का लाभ लेने के यूआईडी कार्ड जारी कर लिए हैं। इनका रिकार्ड भी सीएमओ कार्यालय के अभिलेखों में दर्ज है।
लंबित 717 आवेदनों की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय भेजने के बाद लगातार रिमाइंडर भेजा जा रहा है। निर्धारित समय में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर केंद्र संचालक से कहासुनी के मामले भी सामने आ चुके हैं। हमारे स्तर से की जाने वाली कार्रवाई पूर्ण हो गई है। जल्द ही उच्चाधिकारियों को इस मामले से अवगत कराया जाएगा।
- सौरभ कुमार, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर
सिर्फ उन्हीं दिव्यांगजों के प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। जिनका सत्यापन पूरा हो चुका है। सत्यापन में गड़बड़ी पर कुछ आवेदन निरस्त किए गए थे। एनआईसी को इसकी जानकारी दे दी जाएगी।
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- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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