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गर्मी में आग का शोला न बन जाएं रोडवेज की बसें

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आग का गोला न बन जाएं रोडवेज की बसें
निर्देशों के बाद भी बदहाल हैं अधिकांश गाड़ियां

अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। परिवहन निगम की बसों में वायरिंग के तार इधर उधर बिखरे पड़े हैं, बसों में लगे अग्निशमन यंत्र धूल खा रहे हैं। गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में बिखरे तारों से उठने वाली चिंगारी बस को कभी भी आग का गोला बना सकती है। परिवहन निगम के अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं है। लिहाजा लोगों को बसों में सफर भगवान भरोसे ही करना पड़ रहा है।
परिवहन विभाग के अधिकारी बसों को जीपीआरएस से जोड़ने, लक्जरी बसें चलाने जैसे बड़े-बड़े दावे करते आए हैं। गुरुवार को अमर उजाला टीम ने पीलीभीत डिपो परिसर पहुुंचकर बसों की व्यवस्था देखी तो बसों के इंजन खतरनाक हाल में दिखाई दिए। इंजन को ठंडा करने वाला यंत्र नहीं दिखा, इसके अलावा इंजन के पास वायरिंग के तार खुले पड़े थे जो कभी भी आग लगने की वजह बन सकते हैं। यह आलम तब है जब डिपो में ही वर्कशाप है और दिनभर बसों में रिपेयरिंग का काम होता रहता है। इस प्रकरण में बात करने की कोशिश की गई तो सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सुनील कुमार नागर में अपना कोई पक्ष नहीं रखा।
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जुगाड़ तकनीक से चल रहीं बसें
परिवहन निगम की 70 फीसदी से अधिक बसें जुगाड़ सिस्टम से चल रहीं हैं। जगह-जगह वायरिंग कर बसों को स्टार्ट, लाइट जलाने आदि की व्यवस्था की गई है। यही वजह है कि लंबे रूट पर भेजी जाने वाली निगम की बसें रास्ते में ही दगा दे जाती हैं। खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। चालक व परिचालक बताते हैं कि बसों की स्थिति इतनी दयनीय है कि जिस खराबी को ठीक कराओ वहीं खराबी दोबारा आ जाती है।
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गर्मी में क्या हैं निर्देश
परिवहन विभाग के एमडी के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी वाहनों में टंप्रेचर मीट कार्य कर रहे हों, तापमान 90 से 100 डिग्री से अधिक न हो, रेडियटर में कूलेंट भरा हो, फैन बेल्ट सेवा योग्य हो, कूलिंग सिस्टम पाइप साफ हो, बैट्री लीड में ज्वाइंट न हो, सेल्फ कनेक्शन वायर ज्वांइट ठीक हो, वायरिंग पर ब्लैक टेप किया गया हो, कोई वायर खुला पहीं होना चाहिए, गर्मी में अनफिट बसों को डिपो से बाहर न निकालें।
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