पीलीभीत। एआरटीओ कार्यालय में दलाल हावी होने की खबर अमर उजाला में प्रमुखता से छपने के बाद अब परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों पर शिकंजा कसना शुुरू कर दिया। कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए है कि बिना ड्राइविंग टेस्ट दिए किसी का लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। गाड़ी चलाते समय जरा भी गलती करने पर फेल कर दिया जाएगा और दोबारा चार पहिया लाइसेंस बनवाने के लिए फिर टेस्ट देकर पास होने पर ही स्थायी लाइसेंस जारी किया जाएगा।
दरअसल, एआरटीओ प्रशासन राजेश गंगवार ने एजेंट और दलाली प्रथा को कड़ाई से रोकने के लिए यह सख्ती खबर का संज्ञान लेने के बाद दिखाई। सख्ती से पहले जहां टेस्ट देने वाले सौ-डेढ़ सौ लोगों में मात्र चार-पांच ही फेल होते थे, वहीं अब संख्या कई गुना बढ़ गई है। कर्मचारियों को सख्त निर्देश है कि वह एजेंट, दलाल के चक्कर में न पड़कर खुद से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए आवेदकों का टेस्ट ठीक से कराए।
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दलालों की कमाई हो गई बंद
सालों से एजेंट और दलाल उपभोक्ताओं से मोटी रकम लेकर उनके ड्राइविंग लाइसेंस एआरटीओ से बनवाकर घर बैठे पहुंचाने जाते थे। यहां तक की लोगों को स्थाई लाइसेंस और लर्निंग लाइसेंस के लिए गाड़ी चलाने का टेस्ट तक नहीं देना पड़ता था, लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों की सख्ती के बाद बिना टेस्ट लाइसेंस जारी नहीं किया जा रहा है। फेल होने वालों को वाहन चलाने का प्रशिक्षण लेकर दोबारा टेस्ट में बुलाया जा रहा है। इससे एजेंट-दलालों की कमाई बंद हो गई है। सात दिनों में 400 लोगों ने टेस्ट दिया, जिनमें 80 फेल हो गए। पहले एजेंट-दलाल पैसे लेकर सभी आवेदकों को कार्यालय में साठगांठ होने के चलते पास कराकर उनका ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से बनवा देते थे।
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अधिकारियों के नाम पर होती थी वसूली
एआरटीओ कार्यालय के स्थानीय कर्मचारी ने बताया कि एजेंट-दलाल ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन पेपर, गाड़ी फिटनेस के नाम पर आवेदकों से अधिकारियों को हिस्सा देनेे की बात कहकर कई गुना अधिक रकम वसूलते थे। करीब दो महीने पहले ऐसा ही एक मामला संज्ञान में आने के बाद एआरटीओ ने एक दलाल की कार्यालय में बुलाकर फटकार लगाई थी। इन दिनों एआरटीओ कार्यालय में एजेंट-दलालों की भीड़ कम देखने को मिल रही है।
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टेस्ट में पास कराने के नाम पर दलाल आवेदकों से मोटी रकम वसूलते थे। मामला संज्ञान में आने के बाद एजेंट-दलालों को सख्त हिदायत दी गई है। निष्पक्ष तरीके से टेस्ट हो रहे हैं। पास होने वाले ही लाइसेंस बनाए जाएंगे।
राजेश गंगवार, एआरटीओ प्रशासन