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पटरी पर उगी झाड़ियों से नहर को खतरा

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बाइफरकेशन से निकलने वाली नहरों के डौलो (पटरियों) की लंबे समय से साफ-सफाई न होने से जंगल-झाड़ी उग आई हैं। जिसके चलते नहरों की सुरक्षा पर तो खतरा मंडराता ही रहा है, साथ ही जंगल क्षेत्र होने के चलते वन्यजीव भी जंगल से बाहर निकल कर इन झाड़ियों में शरण ले रहे हैं।
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हेड वर्क्स खंड की सिंचाई परियोजना का मुख्यालय बाइफरकेशन में स्थित है। यहां उत्तराखंड से आने वाली शारदा मुख्य कैनाल नहर से बाइफरकेशन आते ही नहरों के जाल के रूप में फैल जाती है। जिसमें हरदोई ब्रांच, खीरी ब्रांच के अलावा शारदा डैम को भरने वाली फीडर नहर शामिल हैं। तीनों नहर सिंचाई के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। जिसके चलते हेड वर्क्स खंड द्वारा लगातार नहरों की निगरानी की जाती थी। नहरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीपेज आदि की समस्या सामने ना आए इसके लिए बरसात का कार्यकाल समाप्त होते ही नहरों की पटरियों पर उग आने वाली जंगलझाड़ी की सफाई की जाती थी। इधर चार वर्ष पूर्व से इन नहरों पर पटरियों की साफ-सफाई नहीं की जा रही है। जिसके चलते सभी पटरियां जंगल झाड़ी में तबदील हो गई हैं। ऐसे में नहरों में अगर सीपेज आदि की समस्या सामने आती है तो विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। वहीं टाइगर रिजर्व के जंगल क्षेत्र से गुजरने के चलते पटरियों पर उगी झाड़ियों में वन्यजीवों का भी खतरा मंडराने लगा है। बाइफरकेशन व बाइफरकेशन से चूका मार्ग पर एक ओर जंगल तो दूसरी ओर पटरियों पर झाड़ियां खड़ी होने से बाघ समेत अन्य वन्यजीवों का खतरा मंडरा रहा है। वन्यजीवों के डर के चलते राहगीर भी दहशत के साए में मार्ग से गुजरने पर मजबूर हैं।
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बजट न मिलने के कारण नहरों की पटरियों की साफ-सफाई नहीं हो सकी है। बजट उपलब्ध होते ही सफाई कार्य शुरु करवा दिया जाएगा। पटरियों की सुरक्षा को लेकर अभियंता लगातार निगरानी कार्य कर रहे हैं।
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- एनसी पंत, सहायक अभियंता, हेड वर्क्स खंड, बाइफरकेशन
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