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105 दुकानदार बेदखली से बचने को पहुंचे सिविल कोर्ट

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बेदखली से बचने को 105 दुकानदार पहुंचे सिविल कोर्ट
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नहीं मिली राहत, पूरनपुर रामलीला मैदान पर अवैध कब्जे का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। पूरनपुर रामलीला मैदान के अवैध कब्जेदारों पर प्रशासन की सख्ती के बाद कई दुकानदार सामान लेकर चले गए। कुछ ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट के आदेश पर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में बेदखली से बचने को दो याचिकाएं दाखिल की गईं। एक में 101, दूसरी मेें चार याची हैं। इसमें डीएम, एसपी, एसडीएम पूरनपुर और नगर पालिका को पक्षकार बनाया गया है।
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पूरनपुर रामलीला मैदान पर अवैध कब्जेदारों को हटाने के लिए बीते कई सालों से आंदोलन हो रहा है। आरोप है कि कब्जेदारों ने पक्की दुकानें भी बना ली हैं। बीते सप्ताह प्रशासन ने मेला मैदान खाली कराने को सख्ती शुरू की। तब कुछ दुकानदार हाईकोर्ट पहुंच गए। चार अक्तूबर को हाईकोर्ट ने छह अक्तूबर तक यथास्थिति का आदेश देते हुए सिविल कोर्ट में याचिका प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। शनिवार को मेला मैदान का स्वयं को दुकानदार बताने वाले 101 लोगों ने याचिका प्रस्तुत की। याचियों की सूची में यूनुस, रफीक रजा, रईस रजा, बब्बू, रियाज, साबिर, जाकिर, अवधेश, इरशाद, रियासत, अकील, मोहम्मद असीम, शान मोहम्मद, नईम, अनीस, इकबाल, नौशाद, इस्लामुद्दीन, हबीब, रहमत अली, शरीफ, मनीष जैन, भवानी प्रसाद मुरारी, सियाराम उर्फ पप्पू, रजनीश, अमित, प्रदीप अग्रवाल, श्रीकृष्ण, जगदीश , फिरोज, निसार, कबीर, बुंदन, शमशेर अहमद, राजेंद्र, यामीन, अलीहसन आदि शामिल हैं। याचिका में राज्य सरकार, डीएम, एसपी, एसडीएम व नगर पालिका पूरनपुर को प्रतिवादी बनाया गया है। दूसरी याचिका राकेश वर्मा, रामआसरे लाल वर्मा, गोविंदराम, गौरव वर्मा की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि सन 1990 से वह लोग यहां पर व्यापार कर आजीविका चला रहे हैं। यह संपत्ति प्रतिवादीगण की नहीं है। यह कृषि भूमि थी। जिन लोगों की जमीनें थी, उनकी अनुमति से ही व्यापार हो रहा है। एक अक्तूबर को दुकानदार प्रतिवादीगण से मिले थे लेकिन एक न सुनी गई। चार अक्तूबर तक भूमि खाली करने को कह दिया गया। चेतावनी दी कि पुलिस फोर्स की मदद से बुलडोजर चलवाकर निर्माणकार्य को ध्वस्त कर दिया जाएगा। न्यायालय से याचना की गई कि प्रतिवादीगण को दौरान मुकदमा बेदखल करने व तोड़फोड़ करने से रोकने का आदेश दिया जाए। इस याचिका पर प्रतिवादीगण की ओर से लिखित आपत्ति की गई। इस मामले में शनिवार को स्थानीय न्यायालय में देर शाम तक बहस चली पर न्यायालय ने दुकानदारों को कोई राहत नहीं दी। उनके पक्ष में स्टे नहीं मिल सका।
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