कैलाश नदी में नहाते वक्त दो मजदूर डूब गए। साथी मजदूरों ने पहले उनको खुद बचाने का प्रयास किया। असफल होने पर शोर मचाकर ग्रामीणों से मदद मांगी। इसकी सूचना मिलने पर एसडीएम समेत कई अफसर मौके पर पहुंचे। चार घंटे की मशक्कत के बाद दोनों के शवों को बाहर निकाला जा सका। हादसे के बाद से दोनों परिवारों में चीखपुकार मची है। एसडीएम ने मृतक के परिवारवालों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।
अमरिया थाना क्षेत्र के भगौतीपुर गांव निवासी 18 वर्षीय हरपाल पुत्र नरेश कुमार, 19 वर्षीय सूरज पुत्र उमाचरन गांव के ही ताराचंद और रामेश्वर के साथ उडरा गांव निवासी मनोहर सिंह के खेत पर धान लगाने के लिए मजदूरी पर शनिवार को आए थे। खाना खाने के बाद कुछ देर चारों लोगों ने आराम किया। इसके बाद करीब सवा दो बजे चारों मजदूर खेत से 50 मीटर की दूरी पर स्थित कैलाश नदी में नहाने के लिए चल दिए। कैलाश नदी में नहाते वक्त पहले हरपाल डूबने लगा। उसको बचाने का प्रयास करते ही सूरज भी उसके साथ डूब गया। यह देख ताराचंद और रामेश्वर ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह असफल रहे और खुद भी डूबने लगे। इस पर जैसे-तैसे दोनों नदी से बाहर निकले और शोर मचाकर मदद मांगी। ग्रामीणों के जमा होने पर मजदूर सूरज और हरपाल के डूबने की जानकारी दी गई। इसकी सूचना मिलने पर एसडीएम वंदना त्रिवेदी, थानाध्यक्ष दुर्गा सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। काफी संख्या में भीड़ जमा हो गई। इसके बाद तैराकी जानने वाले स्थानीय लोगों की मदद से डूबे मजदूरों की तलाश शुरू की गई। डू्बने के करीब तीन घंटे बाद साढ़े पांच बजे पहले हरपाल और इसके एक घंटे बाद सूरज का शव बाहर निकाला जा सका। एसडीएम ने मृतकों के परिजनों से बातचीत कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। हादसे को लेकर मौके पर हड़कंप मचा रहा।
मजदूरी से रुपये कमाने गए थे, गंवा बैठे जान
नहाते वक्त कैलाश नदी में डूबे दो मजदूरों की मौत ने एक पल में दो परिवारों को गमगीन कर दिया है। जवान बेटों की मौत के बाद से दोनों परिवारों में चीख पुकार मची हुई है। वहीं ग्रामीण परिजनों को ढांढस बंधाने में जुटे हैं। इधर, खुद की नजरों के सामने दोनों को डूबता देख रहे ताराचंद और रामेश्वर का रो-रोकर बुरा हाल है।
जान गंवाने वाले दोनों युवकों के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। मृतक हरपाल तीन भाई और दो बहनों में तीसरे नंबर का अविवाहित था। उसके पिता भी मजदूरी करते हैं। वहीं सूरज दो भाई और एक बहन है। वह सबसे बड़ा था। परिवार का गुजारा भलीभांति हो सके, इसके लिए सभी मिलकर मजदूरी किया करते। उडऱा गांव में मनोहर सिंह के खेत में धान लगाने के लिए वह बीते पंद्रह दिनों से आ रहे थे। बताते है कि उनको इसके लिए प्रतिदिन 200 रुपये मिलते थे। रोज की तरह शनिवार को भी वह गांव के अन्य मजदूरों के साथ आए थे। खेत पर काम करने के बाद दोपहर में थोड़ी देर सभी ने आराम किया। इसके बाद गर्मी अधिक होने पर नदी में नहाने के लिए चले गए। इसके बाद नहाते वक्त दोनों काल के गाल में समां गए। उधर, बेटों के घर लौटने का इंतजार कर रहे परिजनों को जब उनके डूबने की खबर मिली तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन उनकी सलामती की दुआ करते हुए कुछ ही देर में मौके पर पहुंच गए। रेस्क्यू में बीत रहा हर मिनट परिवार की धड़कनें तेज करता चला गया। बाद में शव मिलने के बाद एक झटके में सारी आस और उम्मीद बिखर गई है।