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पब्लिक को रोकें या बाघ को पकड़े वनकर्मी

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पीलीभीत। 20 दिन बाद भी खूनी बाघ को वन विभाग नहीं पकड़ पाया है। मनाही के बाद भी ग्रामीण अभियान क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। ऐसे में वन विभाग को उन्हें रोकने में काफी समय बर्बाद हो रहा है। वहीं किसान अपनी फसल बर्बाद होने की आशंका के चलते खेतों में जाने से खुद को नहीं रो पा रहे हैं।
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अमरिया के हिमकनपुर और बेहरी गांव के मध्य पिछले 20 दिनों से घूम रहे बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग एवं विशेषज्ञों की बड़ी टीम लंबे तामझाम के साथ जुटी हुई है। कई प्रयास के बाद भी बाघ पकड़ में नहीं आ रहा है। पिछले दो दिनों में बाघ ने न तो कोई पड्डा मारा है और न ही वह दिखाई दिया। संभावना जताई जा रही है कि बाघ ने गन्ने अथवा जंगल घास, झाड़ियों में ही छुपा है।
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पस्त होने लगे टीम के हौसले
खूनी बाघ को पकड़ने के लिए लगी टीमों को 20 दिन बाद भी सफलता नहीं मिली है। प्रतिदिन सुबह चार बजे से क्षेत्र में पहुंचकर उसकी खोजबीन करने और कोई नतीजा न निकलने से अब सर्च अभियान उबाऊ होता जा रहा है साथ ही टीम के सदस्यों के हौसले भी पस्त हो रहे हैं।
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फसल मुआवजे पर अब तक फैसला नहीं
बाघों को पकड़ने के लिए चलने वाले अभियान में फसलों को नुकसान होता है। इसके चलते ही पिछले दिनों टंडोला के निकट किसानों ने हाथियों को गन्ने के खेत में घुसाने से रोक दिया था। इसके बाद स्वयं मुख्यमंत्री के जनपद दौरे के बाद प्रशासन ने यह दावा किया था कि फसल मुआवजा की स्वीकृति दिलाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन 15 दिन बाद भी अभियान के दौरान होने वाले फसल नुकसान का मुआवजा देने की स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में वनविभाग की टीम को किसान अभी भी खेतों में जाने से रोक रहे हैं और इसके चलते ही शायद अभियान को सफलता नहीं मिल पा रही है।
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