पूरनपुर। शारदा नदी की बाढ़ और कटान से बचाव के लिए नदी तट पर 18 करोड़ रुपये की लागत से बचाव कार्य किए गए जो अंतिम चरण में हैं, लेकिन नदी के उफनाने से बचाव कार्य बाढ़ को नहीं रोक सके। पिछले साल भी शारदा नदी की बाढ़ ने क्षेत्र में जमकर तबाही मचाई थी। 55 किसानों की दो 200 एकड़ जमीन और उस पर लहलहाती फसलें नदी में समा गईं थी। मुआवजा के लिए गांव चंदिया हजारा में 105 दिन बेमियादी भूख हड़ताल हुई, मगर बाढ़ पीड़ितों को आज तक मुआवजा नहीं मिला।
शारदा नदी क्षेत्र में हर साल तबाही मचाती है। पिछले कुछ सालों से नदी गांव चंदिया हजारा, राहुलनगर, कॉलोनी नंबर छह में तबाही मचा रही थी। पिछले साल भी इन गांवों में बाढ़ से कई दिनों तक जलभराव रहा था। कई दिनों तक घरों में चूल्हे नहीं जले थे। कई लोगों के घर कटने पर उनको बेघर होना पड़ा।
55 किसानों की 200 एकड़ जमीन और उस पर लहलहा रही फसलें नदी में समा गईं थी। नदी किनारे डोजिंग चेनेलाइजेशन कराने, जियो बैग और परकोपाइन लगाने, बाढ़ पीडि़तों को मुआवजा दिलाने के लिए गांव चंदिया हजारा में 105 दिन तक बेमियादी भूख हड़ताल हुई थी। मगर बाढ़ पीडि़तों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका।
करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से जियो बैग और परकोपाइन लगाने इसके साथ ही इतने ही बजट से नदी का डोजिंग चेनेलाइजेशन शुरू हुआ। दोनों कार्य अंतिम चरण में हैं। क्षेत्र के लोगों को लग रहा था कि इस बार चंदिया हजारा की ओर नदी तबाही नहीं मचाएगी, मगर नदी के उफनाने से 18 करोड़ की लागत से हुए काम भी काम नहीं आ सके।
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नदी का जलस्तर कम होने से लोगों ली राहत की सांस
बनबसा बैराज से शारदा नदी में पास किए जा रहे पानी का क्रम सोमवार को भी जारी रहा। रविवार रात को 4 लाख क्यूसेक पानी तक रिलीज किया गया। मगर इसके बाद रिलीज होने वाले पानी की मात्रा लगातार कम होने पर क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि गांव में अब बाढ़ के हालात हैं।