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कोर एरिया में हो रही खेती, वन व राजस्व विभाग की मौज
शारदा पार इलाके में वन भूमि पर काबिज हैं अवैध कब्जेदार
महकमे ने गरीब भूमिहीन के काटे केस, माफियाओं को छोड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा। शारदा नदी के पार नेपाल सीमा तक फैले टाइगर रिजर्व के कोर एरिया क्षेत्र में अवैध खेती हो रही है। खास बात यह है कि इन लोगों के साथ ऐसे बाहरी इलाकों के सैकड़ों लोग भी वन भूमि पर खेती कर रहे हैं, जिनके पास पहले से ही कृषि भूमि है। यह इलाका वन व राजस्व कर्मियों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बना हुआ है। यही वजह है कि आज तक दोनों विभागों का संयुक्त सीमांकन ही ठीक से नहीं हो सका कि कोर एरिया कहां तक है और ग्राम समाज एवं अन्य श्रेणी की भूमि की सीमा कहां है।
शारदा नदी के पार नगरियाखुर्द कलां ग्राम पंचायत का गांव ढकिया ताल्लुके महाराजपुर और रमनगरा ग्राम पंचायत का गांव रमनगरा व गुन्हान का इलाका है। ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में थारु बस्ती के परिवार व बंगाली काबिज है। वहीं रमनगरा व गुन्हान में स्थानीय बंगाली व पुरबिया परिवारों के अलावा टाटरगंज, बूंदीभूड़, गोविंद नगर, राणा प्रताप नगर, खजुरिया व माधोटांडा के लोग भी बड़े पैमाने पर अवैध रूप से वन भूमि खेती कर रहे हैं।
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कुछ साल पहले था जंगल, अब हो रही खेती
कुछ साल पहले इस समूचे इलाके में चारों ओर शीशम का जंगल था। अवैध कब्जेदारों ने शीशम के जंगल को नष्ट कर यहां खेती करनी शुरू कर दी। इन सबके चलते इन ग्राम पंचायतों के गरीब भूमिहीन भी खेती करने लगे। अब वन विभाग ने सूची बनाकर गरीबों के तो केस काट उन्हें नोटिस थमा दिए, लेकिन जो बाहरी क्षेत्र के दबंग भूमाफिया थे, उनके नाम न तो केस काटे गए न ही कोई कार्रवाई की गई।
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वन विभाग ने थमाए नोटिस
वन व राजस्व विभाग का संयुक्त सीमांकन तो आज तक सही से हो नहीं सका, लेकिन शारदा पार जो वन भूमि का इलाका है वह समूचा बफर जोन न होकर कोर एरिया है। इस कारण वन भूमि से अतिक्रमण हटाने को डीएफओ के निर्देश पर बराही के वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने जितने लोगों के खिलाफ विभागीय केस काटे हैं उन सभी को नोटिस भेजकर निर्धारित तिथि पर अपना पक्ष रखने को कहा था। साथ ही जहां-जहां वन भूमि थी वहां जुतान पर भी रोक लगाई थी।
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डीएफओ से मांगी गेहूं बुआई की इजाजत
उक्त भूमि में थारु परिवारों के कब्जे वाली भूमि भी शामिल थी। जब जुतान पर रोक लगी तो अवैध कब्जेदारों में हड़कंप मच गया। गत माह रमनगरा के प्रधान प्रशांत साना व नगरिया खुर्दकलां के प्रधान प्रतोष राय ग्रामीणों के साथ डीएफओ से मिले। उनका कहना था कि उक्त भूमि का संयुक्त सीमांकन कराया जाए। यदि जमीन वन विभाग की निकलती है तो वह जमीन को छोड़ देंगे। उन्हें गेहूं की बुआई करने की इजाजत दी जाए।
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स्थानीय स्तर पर सांठगांठ के बाद कब्जाई गई जमीनें
नोटिस पाने वाले ग्रामीणों को जैसे ही महकमे की मौन स्वीकृति मिली, समूचे इलाके में आनन फानन दर्जनों ट्रैक्टरों से जुताई शुरू हो गई। खास बात यह रही कि नोटिस पाने वाले ग्रामीणों के साथ बाहरी माफियाओं ने भी कई एकड़ जमीन जोतकर गेहूं की बुआई कर दी। बताते हैं कि यह गोरखधंधा को स्थानीय स्तर पर वन कर्मियों से सांठगांठ कर अंजाम दिया गया। मौजूदा समय में टाइगर रिजर्व के अधिकांश कोर एरिया में गेहूं की हरी भरी फसल लहलहा रही है।
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वर्जन:
जल्द होगी बेदखली की कार्रवाई
शारदा पर अवैध कब्जेदारों को नोटिस देकर उनको अपना पक्ष रखने को कहा था। रमनगरा व ढकिया के प्रधानों ने संयुक्त सीमांकन की बात कही थी। उसकी तिथि तय की जा रही है। कोर जोन में किसी को खेती करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। बेदखली की जल्द ही कार्रवाई होगी।
अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी