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रसूखदारों के खिलाफ कारवाई का रास्ता साफ, जांच में जमीन शत्रुसंपति होने की पुष्टि

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पीलीभीत। रसूखदारों ने करोड़ों रुपये की जिस बेशकीमती जमीन का अपने नाम बैनामा कराया है, वह वास्तव में शुत्रुसंपत्ति ही है। इसकी पुष्टि लेखपाल और कानूनगो की संयुक्त जांच में हो गया है। दोनों ने अपनी जांच रिपोर्ट तहसीलदार के माध्यम से अग्र्रिम कार्रवाई के लिए एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी को सौंप दी है।
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टनकपुर हाईवे पर डीएम आवास के बगल में स्थित करोड़ों की जमीन का शहर के रसूखदारों ने अपने नाम बैनामा करा लिया। ग्रीन बेल्ट में स्थित इस जमीन के हाईवे से सटे अगले हिस्से में ध्यान योग केंद्र की स्थापना की आड़ में कब्जा भी कर लिया गया और उस पर खड़े यूकेलिप्टस तथा सेमल के 76 पेड़ भी बिना वन विभाग की अनुमति के कटवा लिए गए। मामला जब उछला तो डीएम ने जमीन पर स्वामित्व के मामले की जांच कराने के आदेश दिए। इससे रसूखदारों में खलबली मच गई और उन्होंने कथित ध्यान योग केंद्र की जमीन से अपना कब्जा हटा लिया, लेकिन फिर इसके पीछे वाली जमीन पर निर्माण की तैयारी शुरू कर दी।
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी को इस जमीन के बैनामा और खसरा खतौनी आदि की जांच करने के निर्देश दिए। एसडीएम ने जांच शुरू की तो जमीन के शत्रुसंपत्ति के होने की बात सामने आई। इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने तहसीलदार सदर से विस्तृत जांच कराने को कहा। तहसीलदार के निर्देश पर लेखपाल विकास वर्मा और राजस्व निरीक्षक ओमप्रकाश ने इसकी जांच की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
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लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि जिलाधिकारी आवास की बाउंड्री से सटी भूमि गाटा संख्या 91, रकबा .454 हेक्टेयर और गाटा संख्या 92/1, रकबा .109 हेक्टेयर वर्तमान में खतौनी खाता संख्या 141 में मैसर्स विनायक एसोसिएट 08 गोदावरी स्टेट पीलीभीत द्वारा नई बस्ती निवासी अनिल कुमार अग्रवाल, एकतानगर निवासी गुरदित्त सिंह सैहमी और बल्लभनगर निवासी दुर्गादास राजानी का नाम दर्ज है। इसके अलावा गाटा संख्या 92/2, रकबा .291 हेक्टेयर खतौनी खाता संख्या 195 पर श्री विनायक चैरेटिबल ट्रस्ट पीलीभीत मैनेजिंग ट्रस्टी सतीश कुमार जायसवाल निवासी परेवा हाउस राजाबाग, परविंदर सिंह सैहमी निवासी एकतानगर और मंजू नाथ पत्नी स्वर्गीय कामेशवर नाथ निवासी मोहल्ला डोरीलाल का नाम दर्ज है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इसी भूमि के पीछे गाटा संख्या 88/1, रकवा 0.405 हेक्टेयर खतौनी खाता संख्या 194 में श्रीविनायक एसोसिएट 08 गोदावरी स्टेट मैनेजिंग ट्रस्टी सतीश कुमार जायसवाल, सतवंत पाल सिंह निवासी गोदावरी स्टेट तथा दुर्गादास राजानी का नाम दर्ज है। लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि फसली वर्ष 1367 की खतौनी का अवलोकन करने से यह साफ हो जाता है कि गाटा संख्या 91, रकवा 0.454 हेक्टेयर, गाटा संख्या 92/1 रकबा 0.109 और गाटा संख्या 92/2 रकबा 0.291 यानि कुल रकबा 0.854 हेक्टेयर भूमि मूल रूप से पाकिस्तानी नागरिक की संपत्ति थी, जो शत्रु संपत्ति घोषित न होकर त्रुटिपूर्ण तरीके से खातेदारों के नाम दर्ज कर दी गई और उनसे हस्तांतरित होकर वर्तमान खातेदारों के नाम दर्ज हुई है। तहसीलदार ने अग्रिम कार्रवाई की संस्तुति सहित यह जांच रिपोर्ट एसडीएम सदर को भेज दी है।

रिकार्ड रूम में जमा लेखपाल के बस्ते से गायब हैं 11 साल की खतौनियां
लेखपाल विकास वर्मा और राजस्व निरीक्षक ओमप्रकाश ने अपनी जांच में यह भी खुलासा किया है कि रिकार्ड रूम में जमा लेखपाल के बस्ते से 1367 फसली वर्ष के बाद फसली वर्ष 1380 की खतौनी ही उपलब्ध मिलीं। इससे जाहिर है कि फसली वर्ष 1368 से लेकर फसली वर्ष 1379 तक की खतौनियां रिकार्ड रूम से गायब हैं। इस खुलासे के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों में खलबली मची हुई है। अब उस अवधि में तैनात रहे अधिकारियों और राजस्व कर्मियों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। अमर उजाला ने बहुत पहले ही यह आशंका जता दी थी कि रिकार्ड रूम से बड़ी संख्या में खतौनियां गायब हैं।

जाने क्या होता है फसली वर्ष
मुगल बादशाह अकबर ने वर्ष 1555 में फसली वर्ष की शुरूआत की थी। अकबर ने अपने सिंहासनारूढ़ होने के हिजरी वर्ष को फसली वर्ष 963 कहा था। तभी से सभी राजस्व अभिलेखों में यही फसली वर्ष चला आ रहा है। उत्तर प्रदेश में फसली वर्ष एक जुलाई से शुरू होकर 30 जून को समाप्त होता है। किसी भी अंग्रेजी वर्ष से 592 घटाकर फसली वर्ष और फसली वर्ष में 592 जोड़कर अंग्रेजी वर्ष का पता लगाया जाता है।

इन पाकिस्तानियों के नाम दर्ज थी शत्रु संपत्ति
जिलाधिकारी आवास से सटी करोड़ों रुपये की जिस बेशकीमती जमीन को रसूखदारों ने अपने नाम करा लिया है, वह फसली वर्ष 1367 की खतौनी मुहाल सफेद में साहू रामेश्वर नाथ इत्यादि, मुंदरजा खाता खेवट नंबर-1, के मालिकान में खतौनी खाता संख्या 87 पर मत्तन खां पुत्र कल्लू खां (पाकिस्तान), खलील खां, शमशुद्दीन खां (पाकिस्तान) के नाम दर्ज है।

यह सवाल अब भी अनसुलझा कामेश्वर नाथ के नाम कैसे आई जमीन
टाइप सेंटर संचालक मोहल्ला डोरीलाल निवासी कामेश्वर नाथ की मृत्यु के बाद यह जमीन उनकी पत्नी मंजूनाथ और बेटे विकास नाथ के नाम पर बतौर विरासत दर्ज हुई थी। लेखपाल और राजस्व निरीक्षक की जांच में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि आखिर टाइप सेंटर चलाने वाले कामेश्वरनाथ के नाम करोड़ों रुपये की ये बेशकीमती जमीन आखिर कैसे दर्ज हुई। रसूखदारों ने मंजूनाथ और विकासनाथ से यह जमीन अपने नाम करा ली थी।

लेखपाल और राजस्व निरीक्षक की जांच रिपोर्ट मुझे एसडीएम सदर के माध्यम से मिल गई है। रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की एक विधिक प्रक्रिया होती है, उसे पूरी करने के बाद ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- वैभव श्रीवास्तव, डीएम

मुझे राजस्व निरीक्षक और लेखपाल से डीएम आवास से सटी जमीन के मामले में जो जांच रिपोर्ट मिली थी, उसे अग्रिम कार्रवाई की संस्तुति के साथ एसडीएम सदर को भेज दिया गया है।
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- विवेक मिश्रा, तहसीलदार सदर
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