पीलीभीत। शहर के लोग सावधान हो जाएं। यदि उनकी कोई पुरानी संपत्ति है तो उसकी खतौनी एक बार देख लें। क्योंकि खतौनियों में छेड़छाड़ की आशंका है। पिछले दिनों एक बड़े अफसर की मिलीभगत से रसूखदारों को दी गई जमीन की जब जांच की गई तो वह शत्रु संपत्ति निकली। जांच के दौरान जांच अधिकारी वंदना त्रिवेदी ने खतौनियों में खुर्दबुर्द किए जाने की ओर इशारा किया है। डीएम भी इससे सहमत है। जांच जारी है।
डीएम आवास से सटी शत्रु संपत्ति का बैनामा अपने नाम कराने वाले रसूखदारों पर प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। जिले में तैनात रहे एक बड़े अफसर की मिलीभगत से इस जमीन पर ध्यान योग केंद्र बनाकर कब्जा करने की कोशिश पर तो डीएम वैभव श्रीवास्तव ने पानी फेर दिया था, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। तब तक यह खुलासा नहीं हुआ था कि यह जमीन शत्रुसंपत्ति है। पीएमओ से रिपोर्ट मांगने के बाद जब डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी ने पूरे मामले की पड़ताल शुरू की है तो शत्रु संपत्ति का मामला सामने आया। उन्होंने इस मामले की जांच के दौरान खतौनी के साथ छेड़छाड़ होने का शक जाहिर किया है, जिसकी जांच की जा रही है।
पिछले दिनों बरेली में खतौनियों को खुरचकर उनमें जमीन का मालिकाना हक बदलने के कई मामले सामने आए थे। इसे लेकर प्रदेश स्तर तक हड़कंप मचा था और कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। बरेली के डीएम ने तब रिकॉर्ड रूम में बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगा दी थी। रिकॉर्ड दफ्तर के कर्मचारियों से लेकर राजस्व विभाग के अधिकारियों तक की भूमिका की जांच कराई जा रही है। बरेली की तरह ही यहां भी भूमाफिया खतौनियों को खुरचवा कर उनमें सरकारी और शत्रु संपत्तियों की जमीनों का मालिकाना हक बदलवाने में लगे हैं। शहर के कई रसूखदारों द्वारा ध्यानयोग केंद्र के नाम पर डीएम आवास के पास की बेशकीमती जमीन कब्जाने के मामले में की जा रही जांच में एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी ने जब यह पाया कि यह जमीन शत्रु संपत्ति की है तो उन्होंने यह संदेह जाहिर किया था कि खतौनी से छेड़छाड़ की गई है। अब जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव भी यह मान रहे हैं कि खतौनी में गड़बड़ी हो सकती है। उनका कहना है कि शत्रु संपत्ति की खतौैनी में किसी व्यक्ति का नाम कैसे दर्ज हो गया, इसकी जांच कराई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि शत्रुसंपत्ति का मालिकाना हक खतौनी में कैसे बदल गया। डीएम का कहना है कि अभी अंतिम रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस सवाल का जवाब मिल सकेगा।
कई अफसर आएंगे लपेटे में
डीएम आवास के पास ग्रीन बेल्ट की करोड़ों की बेशकीमती जमीन पर रसूखदारों को ध्यान योग केंद्र की आड़ में कब्जा कराने का खुलासा डीएम की जांच में होने से हड़कंप मचा है। रसूखदारों को जमीन खैरात में देने वाले कई अफसर रडार पर हैं। शासन स्तर से भी इस प्रकरण की मॉनीटरिंग की जा रही है। इधर, एसडीएम सदर की जांच में शत्रुसंपत्ति का पता चलने के बाद इस बड़े घोटाले की परतें खुलने लगी है। सूत्रों के अनुसार गाटा संख्या के आधार पर खतौनी की जांच में नाजायज तरीके से शहर के कई बड़े रसूखदारों के नाम बैनामा करने के मामले रसूखदारों के साथ ही राजस्व और रजिस्ट्री विभाग के कई अफसर भी लपेटे में आएंगे।
पॉवर कारपोरेशन के अफसर भी निशाने पर
डीएम आवास के बराबर में शत्रु संपत्ति पर ध्यान योग केंद्र स्थापित करने के बाद यहां पॉवर कारपोरेशन के अफसरों की अनुमति पर बिजली का कनेक्शन देकर मीटर भी लगा दिया गया था। डीएम ने जब इस प्रकरण की जांच शुरू कराई तो रसूखदारों पर शिकंजा कसता गया। इस दौरान पॉवर कारपोरेशन के अफसरों ने आनन-फानन में बिजली कनेक्शन काटकर केबल उतार ली और मीटर भी उखाड़ लिया। बिना किसी जांच पड़ताल के वहां कनेक्शन किस आधार पर दिया गया, इसकी भी जांच कराई जा रही है।
दान में जमीन लेना बता रहे हैं रसूखदार
विनायक चैरिटेविल ट्रस्ट, सतीश कुमार जायसवाल और बेनहर पब्ल्कि स्कूल के प्रबंधक परविंदर सिंह सैहमी के नाम विकास नाथ और उनकी मां मंजू नाथ की ओर से रजिस्ट्री कराई गई है। रजिस्ट्री में जमीन दान देने की बात कही है। दानदाताओं का जमीन पर स्वामित्व विरासत का बताया गया है। इस जमीन की रजिस्ट्री 24 अक्तूबर 2011 को हुई थी। क़रीब 20 बीघा इस जमीन की सर्किल रेट के हिसाब से कीमत 17 करोड़ 30 लाख के आसपास है। ऐसे में प्रशासन को यह शक भी है कि स्टांप शुल्क की चोरी करने के लिए तो जमीन दान लेने की बात नहीं कही गई।