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फसल बीमा कंपनी मालामाल.. किसान हो रहे कंगाल

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पीलीभीत। फसलों की क्षतिपूर्ति का लाभ किसानों को देने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों के बजाय बीमा कंपनियां मालामाल हो रही हैं। दो सीजन में बीमा कंपनियों ने करीब 72 हजार किसानों से बीमा फसल के लिए करीब 14 करोड़ का प्रीमियम वसूला, जबकि प्रभावित किसानों को भुगतान सिर्फ पौने दो करोड़ का हुआ। बीमा कंपनियों ने प्रीमियम की रकम में 10 करोड़ रुपये किसानों से वसूला, सरकार के अंशदान के रूप में चार करोड़ रुपये केंद्र और प्रदेश सरकार से लिया। मगर लाभ 50 फीसदी किसानों को भी नहीं मिला। कई किसान तो बीमा कंपनी के मानकों में ऐसे उलझे कि फसल बर्बाद होने के बाद भी अब तक क्लेम की रकम हासिल नहीं कर सके हैं।
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वर्ष 2014 में केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने के लिए जहां अनुदानित योजनाएं चलाईं, वहीं फसलों के किसी आपदा में नष्ट होने पर उसकी क्षतिपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी लागू की। इस योजना में किसानों को 20 प्रतिशत से लेकर शत प्रतिशत क्षतिपूर्ति का लाभ देने का प्रावधान किया गया। खरीफ सीजन 2018 में करीब 18 हजार किसानों ने प्रीमियम के तौर पर बीमा कंपनी को करीब दो करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि केंद्र और प्रदेश सरकार ने अपने अंशदान के रूप में एक करोड़ की प्रीमियम राशि दी। रबी सीजन 2018 में करीब 24 हजार किसानों ने 1.90 करोड़ और केंद्र व प्रदेश सरकार ने करीब 95 लाख का प्रीमियम भरा। खरीफ सीजन 2019 में 4284 किसानों से 4.25 करोड़ और सरकारों से करीब दो करोड़ का प्रीमियम जमा कराया गया। रबी सीजन 2019 में 26 हजार किसानों ने 1.95 करोड़ का प्रीमियम जमा किया तो सरकारों ने भी इसकी आधी राशि प्रीमियम के रूप में जमा की है। दो सीजन में बीमा कंपनी ने कुल 14 करोड़ से अधिक की प्रीमियम रकम वसूल की, लेकिन किसानों को दोनों सीजन में महज पौने दो करोड़ की ही क्षतिपूर्ति मिली। दोनों सीजन में करीब 72 हजार से अधिक किसानों की फसल, जलभराव, बीमारी और आग लगने से नष्ट हुई, लेकिन क्षतिपूर्ति के नाम पर गिने चुने किसान ही लाभ पा सके। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो दोनों सीजन में 70 हजार से अधिक किसानों की फसल के नुकसान की सूचना बीमा कंपनी को दी गई, लेकिन इनमें से सिर्फ 30 हजार को ही फसल क्षति का आधा-अधूरा ही लाभ मिल पाया।
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