फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शावकों के साथ बाघिन ने दी फार्महाऊस के बाहर दस्तक, परिजन सहमे

विज्ञापन
विज्ञापन
06पीबीटीपी21
विज्ञापन



शावकों के साथ फार्म हाउस के बाहर दिखी बाघिन, परिवार सहमा
कुत्तों के भौंकने पर उठे परिजन बाहर बाघ देख कमरे में ही रहे बंद
अमरिया क्षेत्र में ग्रामीणों के लिए सिर का दर्द बना बाघ का कुनबा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत/मझोला। अमरिया तहसील क्षेत्र में जंगल से दूर आबादी क्षेत्र में घूम रहे बाघ ग्रामीणों के लिए सिर दर्द बनते जा रहे हैं। बावजूद इसके महकमा इससे निजात दिलाने के नाम पर जागरूकता व निगरानी तक ही सीमित होकर रह गया है।
शुक्रवार रात मझोला क्षेत्र के ग्राम पंडरी कटईया निवासी हरपाल सिंह के फार्म हाउस के बाहर दो शावकों समेत बाघिन देख परिजनों में हड़कंप मच गया। शनिवार सुबह फार्म हाउस के पास बाघ बाघिन समेत शावकों के पगचिह्न देख सूचना वन विभाग को दी गई।
विज्ञापन

मझोला क्षेत्र के ग्राम पंडरी कटईया में शुक्रवार रात बाघ के कुनबे की आवाजाही के बाद हड़कंप मच गया। यहां दो शावकों के साथ बाघिन चहलकदमी करते हुए गांव निवासी हरपाल सिंह मल्ली के फार्म हाउस के बाहर तक पहुंच गई। गृहस्वामी हरपाल सिंह ने बताया की शुक्रवार रात करीब दो बजे बाघिन अपने दो शावकों के साथ फार्म हाउस के बाहर घूम रही थी। बाहर घूम रहे कुत्तों के भौंकने पर उनके परिजन जागे और बाहर झांका तो बाघ और शावक देख सहम गए। डर के चलते वह लोग कमरे में ही बंद रहे। हालांकि बाघ उनके खेतों में होते हुए आगे की ओर निकल गए। शनिवार सुबह फार्म के आसपास व खेत में बाघों के अलग-अलग आकार के पगचिह्न भी मिले। इसकी सूचना वन महकमे को दी गई लेकिन देर शाम तक कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।
000
दूसरी बार फार्म हाउस के पास पहुंचा कुनबा
अमरिया तहसील क्षेत्र में लंबे समय से मौजूदगी दर्ज कराए बाघ का कुनबा अब आबादी क्षेत्र के पास चहलकदमी करने लगा है। फार्म स्वामी हरपाल सिंह ने बताया बाघों की आवाजाही लगातार उनके फार्म हाउस के पास बनी हुई है।
विज्ञापन

0000
वर्जन
अमरिया क्षेत्र में बाघ के कुनबे की लंबे समय से मौजूदगी है। बाघ की चहलकदमी की रिपोर्ट प्रतिदिन उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। इसके साथ ही डब्ल्यूटीआई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का भी लगातार सहयोग लिया जा रहा है। उच्च स्तर से दिशानिर्देश मिलने के बाद ही कुछ संभव है। मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए हमारी टीम लगातार ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को जागरूक रही है। - संजीव कुमार, निदेशक (सामाजिक वानिकी)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें