पीलीभीत। बच्चों और महिलाओं में कुपोषण दूर करने का जिम्मा संभाले बैठे बाल विकास विभाग में सुपरवाइजरों का टोटा है। खुद केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी एवं डीएम ने शासन को पत्र भेेजकर सुपरवाइजर की मांग की थी, लेकिन शासन ने इस पर उल्टी कार्रवाई करते हुए पांच सुपरवाइजर का गैर जनपद स्थानांतरण कर दिया। जिले में अब मात्र 14 सुपरवाइजर ही रह गए हैं।
जिले में बाल विकास के तहत सभी आठ ब्लाकों में कुल 1960 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इसके लिए प्रत्येक 25 केंद्रों पर एक सुपरवाइजर तैनात होना चाहिए। हालांकि पूर्व के आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 1712 के हिसाब से 66 पद सृजित हैं इसके बावजूद तैनाती मात्र 19 की थी। इस प्रकार एक सुपरवाइजर को लगभग 103 केंद्रों का दायित्व मिला हुआ था। जिले में सुपरवाइजरों की संख्या कम होने के चलते आंगनबाड़ी केंद्रों की मानिटरिंग नहीं हो पा रही है, साथ ही रिपोर्टिंग में घर अथवा कार्यालय में बैठक की जा रही थी। सुपरवाइजर की इस कमी को देखते हुए डीएम की ओर से दो बार एवं एक बार खुद केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी की ओर से शासन को पत्र भेजा गया। शासन को भेजे गए इन पत्रों में जिले में सुपरवाइजर की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन शासन में इसका उल्टा असर हुआ। केंद्रीय मंत्री और डीएम के पत्रों के बाद भी जिले से पांच सुपरवाइजरों का न केेवल स्थानांतरण कर दिया गया बल्कि विभाग ने उन्हें रिलीव भी कर दिया। पांच सुपरवाइजर के कम होने से अब जिले में सुपरवाइजर की संख्या घटकर मात्र 14 रह गई है। सुपरवाइजर की संख्या के अनुपात में केंद्रों की बात करें तो एक के पास लगभग 130 केंद्रों का जिम्मा है। अब इन 130 केंद्रों का सुपरविजन एक सुपरवाइजर कब और कैसे करती होंगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकपूर ने बताया कि शासन को बराबर पत्र लिखे जा रहे हैं, लेकिन स्टाफ नहीं मिल रहा है जिसे दिक्कत हो रही है। किसी तरह काम चलाया जा रहा है।