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भरा पचपेड़ा गोशाला भेजी गईं 134 गायें रास्ते से लापता, डीएम ने दिए जांच के आदेश

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पीलीभीत। पिछले महीने बरखेड़ा से भरा पचपेड़ा गोशाला भेजी गईं 40 गायों की मौत का मामला अभी सुलझ भी नहीं पाया था कि अब गोशाला में शिफ्ट की गईं 134 गायें रास्ते से लापता हो गईं। इन गायों को कागजों में तो देवीपुरा गोशाला से भरा पचपेड़ा गोशाला भेजा गया, मगर हकीकत में यह गाय वहां नहीं पहुंचीं। 134 गायें रास्ते से लापता हो गईं। मामला खुला तो अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से गोशालाओं का भ्रमण कर जांच की। फिर भी गायों का पता नहीं चला। डीएम ने इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। एडीएम न्यायिक ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इससे पशुपालन विभाग के अधिकारियों में अफरातफरी है।
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योगी सरकार गोवंशीय पशुओं के संरक्षण को लेकर बेहद संवेदनशील है। गत वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक जिले में अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराने के साथ उन्हें ठीक से संचालित करने के निर्देश दिए थे। शासन ने गोवंशों के चारे इत्यादि के लिए दो करोड़ रुपये भी भेजे थे। मगर जनपद में इसके बावजूद गायों और गोवंशीय पशुओं की अनदेखी हो रही है। इससे योगी सरकार की मंशा पर पानी ही फिरता नजर आ रहा है। कुछ दिन पूर्व बरखेड़ा की गोशाला से कुछ पशुओं को भरा पचपेड़ा गोशाला भेजा गया था। इसमें अधिकतर गायें मृत पाई गईं थीं। वाहन चालक मृत गोवंशों को सड़क किनारे ही फेंककर चला गया था। यह मामला संज्ञान में आने के बाद बरखेड़ा ईओ और पशु चिकित्साधिकारी के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। यह मामला अभी पूरी तरह से सुलझ भी नहीं पाया कि 134 गायों के रास्ते से लापता होने का मामला सामने आया है। इन गायों को तस्करों को बेचने की चर्चा है।
रजिस्टर में दर्ज तो कहां र्गइं भेजी गईं गायें
देवीपुरा गोशाला में 28 मार्च को 134 गायें अमरिया ब्लॉक की भरा पचपेड़ा गोशाला भेजी गई थीं। देवीपुरा गोशाला के व्यवस्थापक ओमप्रकाश के मुताबिक तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी के आदेश पर 134 गायें भरा पचपेड़ा भेजी गईं थीं। गायें दो दिन में 15-16 ट्रैक्टर ट्रॉलियों के माध्यम से भेजी गईं थीं। इन गायों की रवानगी को बकायदा रजिस्टर में भी दर्ज किया गया। मगर, यह गायें भरा पचपेड़ा गोशाला नहीं पहुंचीं। जब मामले में भरा पचपेड़ा गोशाला व्यवस्थापक रंजीत सिंह काकू से पूछा गया तो उन्होंने गायें उनकी गोशाला में शिफ्ट करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस साल देवीपुरा गोशाला से एक भी गोवंशी पशु उनकी गोशाला में नहीं आया है। ऐसे में अब देवीपुरा गोशाला से शिफ्टिंग के लिए गई 134 गायें आखिर कहां लापता हो गईं। इसमें अधिकारियों से लेकर गाय ले जाने वालों की भूमिका भी संदिग्ध है। लॉकडाउन की वजह से अधिकारी भी इस मामले को लंबे समय तक दबाए रहे।
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व्यवस्थापक केे बयान से मामले में झोल
देवीपुरा गोशाला व्यवस्थापक ओमप्रकाश से पूछा गया तो पहले उन्होंने तत्कालीन पशु चिकित्साधिकारी के निर्देश पर 28 मार्च को 134 गायें भरा पचपेड़ा गोशाला जाने की बात कही। मगर उनसे दूरभाष पर अन्य जानकारी लेने को कॉल की गई तो उन्होंने अपनी ही पहले बताई गई बात को गलत बताया और बोले- गाय कहीं गई ही नहीं थी, तत्कालीन पशु चिकित्साधिकारी के आदेश पर ठंड में मरी हुई गायों को भरा पचपेड़ा ले जाना अभिलेख में दर्ज कर लिया गया था। व्यवस्थापक के बार-बार अपनी ही बात से मुकरने से इस मामले में बड़ी गड़बड़ी होने का अंदेशा है।
मामला मेरे संज्ञान में हाल ही में आया है। जिलाधिकारी द्वारा मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। एक-दो दिन में जांच पूरी हो जाएगी। इसके बाद ही इस प्रकरण में कोई कार्रवाई की जाएगी। - अखिलेश कुमार गर्ग, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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