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गैर इरादतन हत्या में पत्नी व साले को कैद, जुर्माना

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तीन अन्य आरोपी दोषमुक्त, स्पेशल जज ईसी एक्ट ने सुनाया फैसला
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पीलीभीत। स्पेशल जज ईसी एक्ट अमरजीत वर्मा ने गैर इरादतन हत्या के दो आरोपियों को दोषी पाते हुए सात-सात साल कैद और तीन-तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा तीन आरोपियों को सदेह के आधार पर दोषमुक्त किया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा थाना गजरौला क्षेत्र के गांव वाहनपुर के राधेश्याम ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर प्रथम सूचना रिपोर्ट में बताया था कि उसके भाई जमुना प्रसाद का अपनी पत्नी गोमती से विवाद चल रहा था। इस पर गोमती अपने मायके सिमरिया ताराचंद गांव में रह रही थी। 23 जुलाई 2013 की दोपहर करीब दो बजे वादी के भाई जमुना प्रसाद को उसके साले सोनू का फोन आया। उसने गोमती को ले जाने की बात कहकर उसको अपने घर बुला लिया। दूसरे दिन सुबह आठ बजे सिमरिया गांव से किसी व्यक्ति ने परिवार वालों को बताया कि सिमरिया ताराचंद निवासी रीतराम, नन्ही देवी उर्फ रूपन, हेमराम उर्फ गुड्डू, राजीव कुुमार उर्फ सोहनलाल उर्फ सोनू और गोमती देवी उर्फ गोदावरी ने एक राय होकर जमुना प्रसाद की हत्या कर शव को कमरे में बंद कर रखा है। इसके बाद वह ग्रामीणों संग सिमरिया ताराचंद गांव पहुंच गए, लेकिन वहां गोमती देवी व उसके परिवार का कोई नहीं था। मकान में उनके भाई जमुना प्रसाद का शव पड़ा हुआ था। पुलिस ने सूचना मिलने पर शव का पोस्टमार्टम कराया, लेकिन कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसी आधार पर न्यायालय से रिपोर्ट दर्ज कराने एवं विवेचना कराने की गुहार लगाई। जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई।
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विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। राज्य सरकार की ओर से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता अपराध नेमचंद वर्मा ने की। मुकदमे की सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अमरजीत वर्मा ने राजीव कुमार उर्फ सोहनलाल उर्फ सोनू एवं गोमती देवी को जमुना प्रसाद की गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए सात-सात साल कठोर कारावास और तीन तीन हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। इसके अलावा रीतराम, नन्हीदेवी, हेतराम को दोषमुक्त किया है।
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