फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों पर नहीं धान, फिर भी हो गई 78 प्रतिशत खरीद

विज्ञापन
paddy - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
ग्रामीण क्षेत्रों के सभी क्रय केंद्र हुए बंद
विज्ञापन


पीलीभीत। किसानों के पास धान न होने के बाद भी सरकारी खरीद का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को मंडी परिषद के अपर निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्वयं मंडी के क्रय केंद्र पर अभिलेखों में चल रही खरीद पकड़ी थी। इन आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 78 प्रतिशत खरीद हो चुकी है। उधर, प्रशासन ने मंडी के 22 क्रय केंद्रों को छोड़ शेष सभी क्रय केंद्रों को बंद कर दिया है।
शासन के निर्देश पर इस बार 25 सितंबर से सरकारी धान खरीद शुरू हुई थी। शासन से मिले 3.46 लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लिए प्रशासन ने नौ खरीद एजेंसियों के 116 क्रय केंद्र स्थापित किए थे। प्रारंभ से ही इन खरीद केंद्रों का लाभ किसानों को नहीं मिला। जब तक किसान के पास धान रहा तब तक नमी होने और क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी न होने के चलते किसानों को आढ़तों और राइस मिलों पर धान बेचना पड़ा। किसान के हाथ से फसल व्यापारियों और बिचौलियों के हाथों में पहुंचते ही सरकारी धान खरीद बढ़ने लगी। यही कारण है जब पिछले करीब डेढ़ माह से किसान गेहूं की बुआई और धान कटाई में व्यस्त है, तब सरकारी धान खरीद का आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए 78.34 प्रतिशत तक पहुंच गया। 15 दिसंबर तक जिले में 2.71 लाख मीट्रिक टन धान खरीद हो चुकी है जो कुल लक्ष्य 3.46 का 78.34 प्रतिशत है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के क्रय केंद्रों को प्रशासन ने शनिवार से बंद कर दिया। अब केवल मंडियों में लगे क्रय केंद्र ही 31 दिसंबर तक चलेंगे।
विज्ञापन


कैसे होती है खरीद
धान खरीद के लिए खोले गए क्रय केंद्रों को राइस मिलों से संबद्ध किया जाता है, जिन पर क्रय केंद्रों से खरीदे गए धान का उतार कराकर चावल तैयार कराया जाता है। ऐसे में प्रशासन की मूक सहित सहमति पर क्रय केंद्र प्रभारी, हैंडलिंग ठेकेदार, राइस मिलर्स मिलकर मिलों पर खरीदे गए धान को सरकारी खरीद दर्शाकर अभिलेखों में दर्ज कर लेते हैं। इसके बीच के अंतर मूल्य का बंदरबांट हो जाता है। उधर, राइस मिलर्स भी किसानों को जो भुगतान करते हैं उनमें कुछ सरकारी खातों के माध्यम से करा देते हैं और जरूरत के अनुसार कुछ नकद भुगतान कर दिया जाता है। कई विश्वासपात्र किसानों के खातों में भुगतान भेजकर नकद रूप में वापस ले लिया जाता है। शुक्रवार को अपर निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा पकड़ी गई फर्जी खरीद भी इसी प्रकार फर्जी तरीके से चढ़ाई गई खरीद का नमूना थी।

विशेष पखवाड़े में 35 हजार मीट्रिक टन
यूं तो जिले में 30 नवंबर तक की सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद के आंकड़े थमने लगे थे, लेकिन शासन के आदेश पर 15 दिसंबर तक चले विशेष अभियान में 35 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की गई।
विज्ञापन


जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लगे सभी 94 केंद्रों को बंद कर दिया गया है। चूंकि मंडियों में अभी धान की आवक हो रही है, इसलिए तीनों मंडियां में 22 केंद्र अभी चलते रहेंगे।
- डॉ. अविनाश कुमार झा, डिप्टी आरएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें