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यहां किराएदार बनकर आतंकी भी ठहर जाए, तो पता न चले

Fri, 15 Dec 2017 10:58 PM IST
वैभव शुक्ला
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sp - फोटो : amar ujala
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पुलिस को सत्यापन की फुरसत नहीं, गृहस्वामी भी बेफिक्र
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कहीं भारी न पड़ जाए गृहस्वामी और पुलिस की लापरवाही

पीलीभीत। फरियादियों से व्यवहार सुधार, शिकायत पर तत्काल कार्रवाई और हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी जैसे अधिकारियों के तमाम आदेश थाना स्तर पर खोखले साबित होते रहे हैं। इसी तरह किराएदारों का सत्यापन करने का आदेश थाना पुलिस ने कभी गंभीरता से लिया ही नहीं। अधिकारी आदेश देने के बाद मॉनिटरिंग भूल गए, वहीं मातहत दफ्तरों में बैठकर इसका पालन कर गए। नतीजतन कई बार दिए गए इस आदेश की जमीनी स्तर पर कोई पृष्ठभूमि भी तैयार नहीं की जा सकी। उधर, अक्सर मकान खाली कराने के विवाद को लेकर किराएदार को दबंग, अपराधी बताने वाले गृहस्वामी भी उसको रखने के दौरान सत्यापन की जहमत नहीं उठाते, बेफिक्र रहते हैं।
गृहस्वामी व खाकी की इसी लापरवाही का सिला है कि जनपद में कई बार अवैध तरीके से बार्डर क्रास कर घुस आए बांग्लादेशी नागरिक सालों का समय बीतने के बाद पकड़ में आ सके। आलम यह रहा कि पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों ने खुद को भारतीय साबित करने के लिए पहचान पत्र, आधार कार्ड समेत कई फर्जी प्रमाण पत्र भी बनवा लिए। न्यूरिया के बंगाली कॉलोनी इलाके में अब भी इस तरह के कई युवकों के रहने की सूचनाएं सामने आती रहती हैं। वहीं, दूसरी ओर जनपद के नेपाल बार्डर से सटा होने के कारण भी सुरक्षा के लिहाज से अक्सर अलर्ट रहता है। ऐसे में किराएदार सत्यापन में बरती जाने वाली लापरवाही कब मुसीबत का सबब बन जाएगी, इनकार नहीं किया जा सकता। मकान स्वामी हो या फिर अधिकारी किसी को इसकी कोई फिक्र नहीं कि किराएदार बनकर रहने वाले कोई अपराधी तो नहीं?
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होटल मालिकों से दोस्ताना, कार्रवाई भूले
किराएदार का सत्यापन न कराने के पीछे खाकी की लापरवाह कार्यशैली अहम वजह है, तो वहीं होटलों में ठहरने वालों की चेकिंग न करने के पीछे होटल मालिकों से दोस्ताना व्यवहार है। कभी कमरों की व्यवस्था, तो कभी अन्य कारणों के चलते खानपान का बंदोबस्त कराने की खातिर थाना पुलिस चेकिंग का कर्तव्य भूल चुकी है। देश-प्रदेश में आतंकी हमला या फिर स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस के मौके पर अलर्ट जारी होने के बाद भी कार्रवाई औपचारिकता से अधिक नहीं होती। होटल की चेकिंग के नाम पर सिर्फ फोटो खिंचाकर अभिलेख दुरूस्त करने का काम किया जाता है।

बीट सिपाही की पकड़ कमजोर
पुलिस को सफलता तक पहुंचाने के लिए सिपाही का अहम योगदान रहता है। बीट पर सिपाही जितना एक्टिव रहेगा, उतना ही खाकी को बल मिलेगा। वर्तमान समय में हकीकत पर गौर करें तो न तो सिपाही को बीट की कोई जानकारी है, न ही बीट के अंतर्गत आने वाले मोहल्लों के बाशिंदे बीट सिपाही के चेहरे व नाम से अंजान हैं। यही वजह है कि अपराधियों के एक्टिव होने के साथ ही उनके क्षेत्र में रहने की जानकारी पुलिस तक नहीं पहुंच पाती।

कश्मीरी संदिग्ध, कभी लुटेरे निकले किराएदार
किराएदार के रुप में अपराधी भी शहर में पनाह ले चुके हैं। तीन साल पहले हाईवे पर लूटपाट करने वाले बाइक सवार बदमाश मोहल्ला नई बस्ती में किराए के मकान में रहते थे। लूटपाट करने के बाद वह कुछ दिन ठहरने के बाद चले जाते थे। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब महीनों बाद वह उनके हत्थे चढ़ सके। इसके अलावा बीते साल कुछ कश्मीरी युवक भी संदिग्ध हालात में घूमते मिले थे। यह लोग एक माह तक कोतवाली क्षेत्र में रहते रहे, लेकिन पुलिस को इसकी भनक भी नहीं थी। इसके अलावा पूरनपुर के फर्जी पासपोर्ट मामले में भी अगर सत्यापन प्रक्रिया को सही तरीके से किया जाता, तो खाकी फजीहत से बच सकती थी।
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ये बरतें सावधानी
- किराएदार रखते वक्त संबंधित व्यक्ति की आईडी अवश्य लें।
- नौकरी या फिर पढ़ाई को लेकर बताए गए संस्थान में किराएदार की तस्दीक करें।
- संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर इसको नजर अंदाज न करें।
- पुलिस के पास जाकर सत्यापन अवश्य कराएं।
- अगर कोई पुलिसकर्मी सत्यापन से पीछे हटता है, तो शिकायत अफसरों से की जाए।

भरवाए जाएंगे फार्म, तय होगी जिम्मेदारी
किराएदारों की शक्ल में कई बार अपराधी भी पनाह लेते हैं, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। गृहस्वामी को आगे आकर किराएदार रखते वक्त सत्यापन प्रक्रिया करानी चाहिए। इसके लिए फार्म बंटवाकर सत्यापन कार्य कराकर जिम्मेदारी तय की जाएगी। अगर कोई सत्यापन नहीं कराता है, और बाद में उसके मकान में रहने वाला अपराधी निकलता है, तो उस पर कार्रवाई होगी।
कलानिधि नैथानी, एसपी
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