पीलीभीत। टाइगर रिजर्व के बाद टाइगर सफारी के रूप में जिले को और तोहफा मिलने की उम्मीद बढ़ती नजर आ रही है। विभाग से भेजे गए प्रस्ताव पर चर्चा के बाद शासन ने प्रोजेक्ट टाइगर के नेतृत्व में पाच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जिसकी लखनऊ में आज पहली बैठक बुलाई गई है।
जिले के लगभग 73 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में फैले जंगलों को नौ जून 2014 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसके बाद से यहां बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके बाद भी यहां आने वाले पर्यटकों को बाघ के दर्शन मुश्किल से होते हैं। अक्सर पर्यटकों को मायूस होकर लौटना पड़ता था। अब वनसंरक्षक वीके सिंह ने जंगल से बाहर आकर हमलावर हो रहे अथवा अन्य कारणों पकड़े जाने वाले बाघों को खुले क्षेत्र में सुरक्षित रखने के लिए टाइगर सफारी का प्रस्ताव रखा था। शासन से अनुमति मिलने बाद टाइगर रिजर्व कार्यालय से उसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया। अब शासन से इसे सैद्धांतिक रूप से सहमति देकर पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जिले के दौरे पर आए वनसंरक्षक वीके सिंह यह जानकारी देते हुए बताया कि निदेशक प्रोजेक्ट टाइगर अजय द्विवेदी के नेतृत्व में बनी कमेटी में मुख्य वनसंरक्षक बरेली अरविंद गुप्ता, वनसंरक्षक वीके सिंह, सेवानिवृत्त प्रमुख मुख्य वनसंरक्षक आरएस भदौरिया एवं दुधवा नेशनल पार्क के अनिल कुमार पटेल को शामिल किया गया है।
टाइगर रिजर्व में रखे जाएंगे 50 गाइड
वनसंरक्षक ने बताया कि टाइगर सफारी के प्रोजेक्ट पर काम के साथ ही टाइगर रिजर्व के 15 नवंबर से शुरू होने वाले सीजन की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि इस बार 50 गाइड तैनात किए जाएंगे। इसके लिए 18 अक्तूबर तक आवेदन मांगें गए हैं। सभी आवेदकों को 25, 26 व 27 अक्तूबर प्राइमरी ट्रेनिंग देकर परीक्षा ली जाएगी। लिखित परीक्षा में पास अभ्यर्थियों में से साक्षात्कार कर गाइडों का चयन किया जाएगा।