शारदा नदी धुरिया पलिया क्षेत्र में इस साल बरसात की शुरुआत से लेकर अब तक करीब दो करोड़ रुपये की भूमि सहित लगभग एक करोड़ की कृषि फसलों को निगल चुकी है। सर्वाधिक 40 एकड़ भूकटान धुरिया में हुआ है। इसके अलावा इन दोनों गांवों के अपस्ट्रीम में बिजौरी खुर्द का जंगल और डाउनस्ट्रीम में चंदपुरा के जंगल में भी कटान जारी है। जिसका आंकलन नहीं किया जा सका है।
राजस्व लेखपाल राजेश कुमार ने बताया कि नदी का सर्वाधिक कटान धुरिया गांव में हो रहा है। यहां अब तक करीब 40 एकड़ जमीन कट चुकी है। खड़ी फसलें भी तबाह हुई हैं। पलिया में भी कटान हो रहा है। इसकी रिपोर्ट आला अफसरों को लगातार भेजी जा रही है। करीब दो करोड़ रुपये की भूमि और एक करोड़ की फसल अब तक नदी में समा चुकी है। उन्होंने बताया कि कृषि भूमि के मुआवजे का जहां तक सवाल है तो यहां सब बड़े किसानों की भूमि है और दस एकड़ से ऊपर भूमि वाले किसानों को भूमि मुआवजे का प्रावधान नहीं है, लेकिन जो छोटे कृषक हैं उनकी भूमि का सर्वे किया जाएगा। भूमि और फसल के मुआवजे की रिपोर्ट अधिकारियों के माध्यम से भेजी जाएगी। अभी बरसात के मौसम में दो माह शेष है।
बिजौरीखुर्द और चंदपुरा जंगल में भूकटान जारी
धुरिया पलिया की सीमा के अपस्ट्रीम में बिजौरी खुर्दकलां व डाउनस्ट्रीम में चंदपुरा का जंगल है। यहां भी भूकटान तेजी से जारी है। क्षेत्रीय किसानों के मुताबिक जंगल में हो रहे भूकटान से बेशकीमती पेड़ नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। जंगल में इस बार भूकटान का दायरा बढ़ा दिखाई दे रहा है। यदि ऐसी ही स्थिति रही तो नदी बहुत जल्द ही धुरिया पलिया मार्ग तक आ सकती है। इधर नदी का रमनगरा बुझिया क्षेत्र में भी भूकटान जारी रहा, लेकिन कटान की गति अन्य दिनों की अपेक्षा धीमी रही। नदी की धार ठोकरों को लगातार निशाना बनाए हुए है। जानकारों की मानें तो यदि यहां भूकटान नहीं रुका तो नदी के दाएं किनारे की ओर तेजी से भूकटान हो सकता है।
धुरिया-पलिया में भूकटान हो रहा है, लेकिन अभी इस क्षेत्र में कोई बाढ़ नियंत्रण कराना संभव नहीं है। यहां पहले से ही धुरिया पलिया मार्ग के किनारे ठोकरें बनाई गई थीं। - ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड