फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रमदानी हुए गायब, मनरेगा मजदूरों से हुई खुदाई

विज्ञापन
विज्ञापन
श्रमदानी हुए गायब, मजदूरों से कराई खुदाई
विज्ञापन

गोमती नदी की अविरलता को देवीपुर मानइर से नाले की खुदाई भी शुरू
03 पीबीटीपी 32
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा/पीलीभीत। गोमती नदी में अविरल धारा बहाने के लिए पिछले काफी दिनों की कवायद के बाद सोमवार से श्रमदान एवं मनरेगा मजदूरों को लगाकर खुदाई का शुभारंभ कराया गया था। पहले दिन काफी उत्साह एवं लंबे चौड़े दावों के साथ गोमती नदी के तट पर श्रमदानियों का हुजूम उमड़ा था। लेकिन इस महा अभियान की दूसरे दिन ही हवा निकलती दिखाई दी। मंगलवार को न कोई अधिकारी दिखा, न नेता और स्वयंभू समाजसेवी। नाममात्र के श्रमदानी पहुंचे। इसके चलते मशीनों एवं मनरेगा मजदूरों से काम कराया गया। खुदाई के साथ साथ नदी में पानी उपलब्ध कराने के लिए देवीपुर माइनर से उद्गम स्थल तक नाले की खुदाई भी शुरू की गई।
गोमती नदी को पुनर्जीवित कर उसमें अविरल धारा बहाने के लिए करीब एक माह से जोरशोर से तैयारी चल रही थी। सरकारी मशीनरी के साथ साथ इस पुनीत कार्य का श्रेय लेने वालों की होड़ लगी रही। कई दिनों से अखंड पाठ, आरती और यात्रा सहित कई क्रिया कलाप किए गए। इस सबके चलते सोमवार को हजारों की संख्या में जनसैलाब गोमती तट पर उमड़ा था। गोमती के प्रति लोगों में श्रद्धा के साथ जुनून भी दिख रहा था। पहले दिन शुरू हुए खुदाई कार्य में श्रमदान करने वालों के साथ फावड़ा लेकर फोटो खिंचाने एवं कारसेवा का प्रदर्शन करने वाले भी कम नहीं थे। दूसरे दिन इन सबकी पोल खुलती नजर आई। मंगलवार को नाम मात्र के श्रमदानी ही गोमती तट पर पहुंचे। इसके लिए अधिकारियों को मनरेगा मजदूरों से काम शुरू कराना पड़ा। वहीं दूसरी और सिंचाई विभाग ने जेसीबी एवं अन्य मशीनों से नदी क्षेत्र में खुदाई कराई गई।
विज्ञापन

000000
सफाई की जगह तट पर गंदगी ढेर
03 पीबीटीपी 33
माधोटांडा। सोमवार को जुटे श्रमदानी गोमती में स्वच्छ और निर्मल धारा बहाने के संकल्प के साथ जुटे थे। इस कार्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गंगा सहित सभी पवित्र नदियों के सफाई अभियान से भी जोड़कर देखा जा रहा था लेकिन नदी की सफाई करने को जमा हुए लोग नदी तट पर गंदगी छोड़ गए। मंगलवार को उद्गम स्थल चारों ओर भोजन के पैकेट, पन्नियां, पत्तल, गिलास आदि पड़े दिखाई दिए।
000
मशीन से सात मीटर की चौड़ाई में हुई खुदाई
03 पीबीटीपी 24
माधोटांडा। उद्गम स्थल से आगे जहां पर सोमवार को श्रमदान शुरू हुआ था वहां से मंगलवार को सिंचाई विभाग की ओर से मशीन से खुदाई प्रारंभ की गई। मुख्य झील के बाद तालाब के दक्षिणी छोर से शुरू होकर सात मीटर चौड़ाई में खुदाई कर नदी/ नाले का रूप दिया जा रहा है। इससे निकलने वाली मिट्टी को दोनों डाला जा रहा है। शाम तक करीब 200 मीटर तक खुदाई की गई। इसके अलावा हरीपुर-सुंदरपुर मार्ग के किनारे जेसीबी मशीन लगाकर खुदाई कराई गई।
0000
झील को पानी देने के लिए नाले की खुदाई शुरू
माधोटांडा। उद्गम स्थल की मुख्य झील को देवीपुर माइनर से पानी देने की योजना अधिकारियों ने तैयार की है। इसके लिए श्रमदान शुरू होने से दो दिन पहले ही लेखपालों की मदद से पैमाइश कराई गई थी। मंगलवार को इस नाले पर प्रधानपति योगेश्वर सिंह एवं पंचायत सचिव रामकिशोर की देखरेख में खुदाई शुरू हुई। इसमें कुछ श्रमदानियों ने खुदाई की जबकि बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूरों को लगाया गया। अधिकारियों के निर्देश पर माइनर से झील तक नाले की खुदाई तो शुरू करा दी गई लेकिन माइनर एवं रजवाह की चौड़ाई बढ़ाने पर फिलहाल कोई काम शुरू नहीं हुआ।
0000
खुदाई शुरू होने से कई किसानों के चेहरे मुरझाए
गोमती की अविरल धारा बहाने से जिले भर में खुशी ही लहर दिखाई दे रही है वहीं मशीन से खुदाई शुरू होने से किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं। दरअसल मशीन से चल रही खुदाई के दौरान मिट्टी को बाहर की ओर डाला जा रहा है जो किसानों के खेतों में गिर रही है। किसान छोटेलाल, हाजी नवाब अली, रजिया बेगम आदि कहना था कि प्रशासन ने सात मीटर जगह में खुदाई की बात की थी लेकिन अब मशीन से खुदाई कराकर मिट्टी बाहर की ओर उनके खेतों में डाली जा रही है। इससे उनकी जमीन नदी में चली जाएगी। किसानों का कहना है कि राजस्व प्रशासन को सही पैमाइश कराकर पूर्व में ही सही स्थिति की जानकारी देनी चाहिए थी। सूत्रों की मानें तो इस मामले में किसान अदालत कर दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।
0000
पहले दिन श्रमदान के माध्यम से कार्य का शुभारंभ होना था। अब बाकी काम मनरेगा एवं मशीनों के माध्यम से ही कराया जाएगा। इसमें यदि कोई श्रमदान करता है उसका भी सहयोग लिया जाएगा। नदी की खुदाई कराकर अविरल धारा बहाने तक काम जारी रहेगा।
विज्ञापन

पुष्पा देवरार, एसडीएम कलीनगर
-------------

पूर्व में भी हो चुकी है कवायद
पीलीभीत। गोमती नदी में अविरल बहाने की कवायद पहले भी कई बार हो चुकी है। वर्ष 2013-14 में माधोटांडा से लखनऊ तक गोमती की धारा बहाने को मनरेगा से काम कराने की योजना शासन से स्वीकृत हुई थी। इस पर जब तत्कालीन डीएम ओएन सिंह ने गोमती स्थल पहुंचकर इसका नक्शा देखा और स्थिति की जानकारी ली तो राजस्व टीम ने उन्हें नदी की जमीन पर कब्जे की जानकारी ली साथ ही यह भी बताया कि कब्जेदारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है जिसमें कोर्ट ने स्टे देते हुए कब्जेदारों को इस क्षेत्र से हटाने से पहले कहीं दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। चूंकि जिले में इतनी अधिक मात्रा में जमीन उपलब्ध नहीं है इसलिए यह प्रस्ताव पुन: ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद सपा सरकार में सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने गोमती स्थल पहुंचने पर अविरल धारा बहाने को प्रोजेक्ट मांगा था। इस सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने माधोटांडा रजवाहा से गोमती की फुलहर झील तक नाला बनाने को प्रोजेक्ट स्वीकृत कर काम कराया था। रजवाहा से गोमती तक पानी लाने को सिंचाई विभाग ने 2.25 करोड़ बहा दिए लेकिन पानी तो दूर पानी की धार भी नहीं बह रह सकी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें