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नए साल पर 1100 प्रेरकों को झटका, हो गए बेरोजगार

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साक्षर भारत योजना का कार्यकाल हुआ समाप्त
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बकाया मानदेय को लेकर भटकेंगे प्रेरक व कोआर्डिनेटर
केंद्र सरकार ने योजना बढ़ाने को नहीं दी मंजूरी

पीलीभीत। साक्षर भारत मिशन के तहत जिले में संचालित किए जा रहे लोक शिक्षा केंद्रों का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो गया। केंद्र सरकार ने इस योजना की अवधि बढ़ाने की मंजूरी नहीं दी है। ऐसे में निरक्षरों को साक्षर बनाने में जुटे 1113 प्रेरक व पांच कोआर्डिनेटर को नए साल के पहले दिन से ही बेरोजगारी का दंश झेलना पड़ेगा। इसको लेकर प्रेरकों में मायूसी देखी जा रही है।
जिले में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए भारत साक्षर मिशन के तहत साक्षरता निदेशालय द्वारा लोक शिक्षा केंद्र खोले गए थे। अपने जिले में अगस्त 2012 में साक्षरता कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए 599 लोक शिक्षा केंद्रों खोले गए। प्रत्येक लोक शिक्षा केंद्र में एक पुरुष व एक महिला प्रेरक तैनात किया गया। प्रत्येक वर्ष इन शिक्षा केंद्रों में दो बार साक्षरता परीक्षा भी कराई गई।
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वर्तमान में तैनात हैं 1113 प्रेरक, व पांच कोआर्डिनेटर
साक्षरता कार्यक्रम के तहत चार डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर, सात ब्लॉक कोआर्डिनेटर व 1198 प्रेरकों के पद सृजित है। वर्तमान में दो डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर, तीन ब्लॉक कोआर्डिनेटर व करीब 1113 प्रेरक तैनात हैं। 31 दिसंबर को साक्षर भारत योजना बंद होने से यह सभी नए साल के पहले दिन से ही बेरोजगार होने का देश झेलेंगे।

तीन माह की बढ़ाई गई थी अवधि
साक्षरता निदेशालय के मुताबिक जिले में वर्ष 2012 से शुरू किया गया साक्षरता कार्यक्रम 31 मार्च 2017 का चलाया जाना था। 31 मार्च के बाद इन लोक शिक्षा केंद्रों का संचालन बंद होने की संभावना थी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा साक्षर भारत योजना को छह माह और बढ़ाते हुए इसका कार्यकाल 30 सितंबर किया गया। इसके बाद पुन: योजना को 31 दिसंबर तक तीन माह के लिए बढ़ा दिया गया था। हालांकि इन सभी का बीते कार्यकाल का नवीनीकरण अभी तक नहीं हो सका है। इसकी पत्रावली अभी भी जिला प्रशासन के पास पड़ी है।
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बकाया मानदेय दिया नहीं, कर दिया बेरोजगार
जिले में साक्षरता कार्यक्रम बंद होने के बाद इससे जुड़े सभी कोआर्डिनेटर व प्रेरक नए साल के पहले दिन से ही पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे। खास बात यह है कि साक्षरता कार्यक्रम का कार्यकाल खत्म होने के बाद इन्हें बेरोजगारी का दंश तो झेलना ही पड़ेगा, साथ ही डेढ़-डेढ़ साल के बकाया मानदेय भुगतान के लिए अब ठोकरें खानी पड़ेगी। बताते हैं कि डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर का 18-18 माह व प्रेरकों का 16-16 माह का मानदेय नहीं मिला है।

साक्षर भारत योजना 31 दिसंबर को समाप्त हो चुकी है। शासन की ओर से अभी इनके कार्यकाल बढ़ाने संबंधी कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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