कस्बा स्थित दारुल उलूम गौसिया बरकातिया में एक रोजा दयारे हबीब कांफ्रेंस हुई। इस मौके पर मदरसे में हाफिजे कुरआन मुकम्मल करने वाले 12 बच्चों की दस्तारबंदी के साथ उन्हें हाफिज की डिग्री से नवाजा गया। शुक्रवार रात आयोजित इस जलसे का आगाज हाफिज फाजिम रजा ने कुरान की एक आयत पढ़कर की।
इसके बाद मुंबई से आए शायर-ए-इस्लाम फजीर रजा ने नात मनकबत पढ़ी। मौलाना कारी खतीब रजा हश्मती ने तकरीर की। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया इस्लाम को बदनाम करने पर तुली है, लेकिन इस्लाम पाक-साफ मजहब है। इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद संलल्लाहो अलैह वसल्लम ने पड़ोसियों का ख्याल रखने, गरीब-मजलूमों की मदद करने व बड़ों का अदब करने के साथ रास्ते में पड़ने वाले पेड़ पौधों तक का ख्याल रखने की हिदायत की है। जो इस्लाम इस तरह की शिक्षा देता हो उस मजहब को आतंकवाद से कैसे जोड़ सकते हैं।
इसके बाद शायर इरशाद रजा ने नात पढ़ी। मुंबई से आए फिरोज रजा हश्मती ने तकरीर की। बहेड़ी से आए नासिर रजा ने भी देश की एकता का संदेश दिया। भोर तक चले इस कार्यक्रम में शायर इसराइल रजा, मौलाना हनीफ अहमद, अफरोज रजा, फरीद अहमद, आसिफ खां ने भी जलसे को खिताब किया। सुबह शनिवार सुबह चार बजे सलातो सलाम पढ़ा गया। इसके बाद मुल्क व कौम की तरक्की के साथ अमन चैन की दुआ पढ़ी गई। इस मौके पर ग्राम प्रधान तस्लीम शान खां, जिला पंचायत सदस्य रियाज खां, निराले खां, अतीक अहमद अंसारी, गुलाम अहमद, हाजी सज्जाद खां आदि मौजूद रहे।