मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने को ग्रामीणों से संपर्क जरूरी
डब्ल्यूटीआई की ओर से आयोजित हुई कार्यशाला
वन्यजीव संबंधी जानकारी के साथ पगचिह्न की पहचान करने का दिया परीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बाघ सुरक्षा माह के तहत बुधवार को पीटीआर सभागार में डब्ल्यूटीआई की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें डब्ल्यूटीआई से जुड़े प्रेम चंद पांडे ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के विषय में चर्चा करते हुए कार्यशाला में मौजूद वनकर्मियों को जीपीएस और वन्यजीवों के पगचिह्नों की कैसे पहचान करें इसका प्रशिक्षण दिया गया।
एक दिसंबर से बाघ सुरक्षा माह के तहत वन विभाग और इससे जुड़ी संस्थाओं की ओर से जिलेभर में गोष्ठियों का आयोजन कर वन्यजीव संबंधी जानकारी देकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। इधर, बाघ सुरक्षा माह के तहत बुधवार को डब्ल्यूटीआई की ओर से टाइगर रिजर्व मुख्यालय सभागार में एक कार्यशाला का आयोजित की गई। जिसमें वन विभाग से जुड़े अधिकारी व सभी रेंजों के वनकर्मियों ने भाग लिया। कार्यशाला में डब्ल्यूटीआई टीम से जुड़े प्रेम चंद पांडे ने वन्यजीव संबंधी जानकारी साझा करते हुए कहां कि वन्यजीवों की सुरक्षा व मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए वन विभाग से जुड़े लोगों को जंगल सीमा से सटे ग्रामीणों से बेहतर संपर्क साधना होगा। इसके अलावा टीम से जुड़े फ्रेंसिस ने जीपीएस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के अलावा बाघ व अन्य वन्यजीवों के पगचिह्न की कैसे पहचान करें, इसकी जानकारी दी। कार्यशाला में रिटर्न पेपर प्रतियोगिता के माध्यम से प्रश्न भी पूछे गए। इस मौके पर एसडीओ प्रवीण खरे, रेंजर राजकुमार शर्मा, डिप्टी रेंजर राकेश कुमार चितौरिया के अलावा वन दरोगा मोहित सिंह, वशिष्ठ कुमार, सद्दीक मोहम्मद समेत वनकर्मी मौजूद रहे।