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नौ साल से बिना डाॅक्टर के चल रहा सरकारी अस्पताल

Fri, 13 Apr 2018 08:48 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
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health centre
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तराई में बसे 25 से अधिक गांवों की स्वास्थ्य सुरक्षा भगवान भरोसे है। गभिया सहराई में बना राजकीय स्वास्थ्य केंद्र डाक्टर न होने की वजह से खुद बीमार है। इस अस्पताल में आज तक किसी डाक्टर की तैनाती नहीं की गई है। यहां तैनात फार्मासिस्ट ही मरीजों का इलाज करते आ रहे हैं।
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फार्मासिस्ट करते हैं मरीजों का इलाज
माधोटांडा से लगभग 35 किलोमीटर दूर नेपाल सीमा से सटे इलाके के गांव गभिया सहराई में राजकीय स्वास्थ्य केंद्र है। करीब नौ साल पहले 65 लाख की लागत से बनाए गए इस अस्पताल में अस्पताल भवन के अलावा चिकित्सक सहित कर्मचारियों के रहनेे के लिए आवास भी बनाए गए। क्षेत्रवासियों के मुताबिक उस दौरान यह कहा गया था कि इसको न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज तक इस अस्पताल में किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई। यहां मात्र एक फार्मासिस्ट मनोज कुमार गोस्वामी व एक वार्ड ब्वाय तैनात हैं। जिनके सहारे मरीजों का इलाज हो रहा है। वहीं देखरेख के अभाव में अस्पताल भवन भी जर्जर होता जा रहा है।

लंबा सफर तय करने के बाद मिलता है इलाज
इस अस्पताल से नेपाल सीमा से सटा गांव सुंदरनगर, बंदरबोझ, बूंदीभूड़, मठइयालालपुर, नौजल्हा नंबर एक, नौजल्हा नंबर दो, महाराजपुर समेत करीब 25 से अधिक गांव जुड़े हैं। अस्पताल में इलाज की व्यवस्था न होने से इन गांवों के लोग जरूरत पड़ने पर 40 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माधोटांडा पहुंचते हैं। वहीं अधिकांश मरीज पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में इलाज कराने को मजबूर हैं।
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धरना प्रदर्शन के बाद भी नहीं मिले डॉक्टर
अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती को लेकर धरना प्रदर्शन से लेकर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के आगे गुहार लगाई, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। बताते हैं कि यहां पूर्व में तैनात रहे सीएमओ डॉ. परमिंदर सिंह व डॉ. राकेश तिवारी ने धरना प्रदर्शन होने के बाद स्वास्थ्य कैंप लगवाए और डॉक्टर की तैनाती का आश्वासन भी दिया, लेकिन आश्वासन झूठे साबित हुए।

इलाज के अभाव में हो चुकी है कई मौत
गभिया सहराई के पूर्व प्रधान शंकर राय, महाराजपुर की प्रधान आशा मिस्त्री, रमनगरा प्रधान प्रशांत साना बताते हैं कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी समेत अन्य नेताओं से यहां कई बार डाक्टर की तैनाती की मांग की लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। यहां गंभीर हालत में मरीजों को जिला या तहसील मुख्यालय ले जाने में जर्जर व ऊबड़ खाबड़ मार्गों से जंगल के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। बाढग़्रस्त इलाका होने के चलते यहां इलाज के अभाव में कई मरीजों की मौतें भी हो चुकी हैं।

गभिया सहराई में डिस्पेंसरी है। डिस्पेंसरी के मानक के अनुरूप एक फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय की तैनाती है। क्षेत्र बड़ा होने के चलते शासन को डाक्टर की तैनाती के लिए पत्र भेजा गया है।
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- डॉ. ओपी सिंह, सीएमओ
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