माधोटांडा। शारदा डैम के नजदीक मृत साइबेरियन पक्षियों की बरामदगी व शिकारियों को पकड़े जाने के बाद एक बार फिर वर्षों से बरती जा रही लापरवाही भी उजागर हो गई है। वन महकमा भले इसको गुडवर्क बता पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन मेहमान पक्षियों की सुरक्षा आज भी खतरे में है। इससे पहले भी शारदा डैम के आसपास के क्षेत्र में इन पक्षियों के शिकार की घटनाएं उजागर हो चुकी हैं।
तराई क्षेत्र के शारदा सागर डैम के 14.6 किमी पर एक दिन पूर्व बराही रेंज के वनकर्मियों ने घेराबंदी कर खटीमा के वन महोलिया निवासी शिकारी विनोद, सूरज, मनीब व जितेंद्र को पकड़ लिया था। इनके पास से चार मृत साइबेरियन पक्षी भी बरामद हुए थे। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह के मुताबिक पकड़े गए शिकारियों के पास बरामद किए पक्षियों का पोस्टमार्टम कराने के बाद जेल भेज दिया गया। शिकारियों की गिरफ्तारी से वन महकमा खासा उत्साहित है, लेकिन इन प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा को टाईगर रिजर्व, उत्तराखंड के खटीमा वन प्रभाग के अधिकारियों को साझा प्रयास करने होंगे, तभी इन मेहमान पक्षियों की सुरक्षा की जा सकती है। इससे पूर्व भी बराही रेंज के वन दरोगा रामबहादुर ने वन महोलिया के एक शिकारी को पकड़ा था, लेकिन उसे राजनीतिक दबाव के चलते जुर्माना लेकर छोड़ दिया।
दरअसल शारदा डैम 22 किमी लंबा है। जिसका 17 किमी लंबा क्षेत्र टाइगर रिजर्व के पीलीभीत सीमा में पड़ता है जबकि पांच किमी का क्षेत्र उत्तराखंड के खटीमा व सुरई रेंज में पड़ता है। प्रवासी पक्षियों का शिकार दोनों इलाकों में होता है। सूूत्रों के मुताबिक उत्तराखंड के शिकारी छोटी नावों के सहारे शिकार करते हुए उत्तराखंड तक निकल जाते हैं। यही शिकारी इन पक्षियों का शिकार कर उसे जनपद व उत्तराखंड में चोरी छिपे बिक्री करते हैं। डैम में प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के पहले दोनों प्रांतों के वन अधिकारियों व संबंधित वन रेंजों की बैठकें होती थीं और संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग भी की जाती थी, लेकिन अब यह दूर की कौड़ी बन चुके हैं। पेट्रोलिंग तो बंद ही हो चुकी है। कभी कभार सटीक मुखबिरी मिल जाती है तो कार्रवाई कर दी जाती है। हालांकि टाइगर रिजर्व के आला अफसर तो आज भी मोटरवोट से पेट्रोलिंग करने व अपने क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों का शिकार न होने की बात कह रहे हैं। इधर खटीमा क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी बाबूलाल का कहना है कि हमारे क्षेत्र में जब पानी ही नहीं है तो शिकार काहे का। जब शारदा डैम में पानी भरता है तो ही। शिकारी सक्रिय होते हैं। प्रवासी पक्षी भी उसी ओर होते हैं, जहां डैम में पानी अधिक होता है। इसके बावजूद खटीमा व सुरई रेंज को सतर्क कर रखा है।