खेकड़ा (बागपत)।
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों से लेकर कक्षा आठ तक के राजकीय सहायता प्राप्त और अनुदानित मदरसों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में अब क्यूआर कोड होगा। इस कोड को स्कैन करने पर किताब से जुड़ी सारी जानकारी मिल जाएगी। इससे यह पता चलेगा कि इन किताबों को परिषद ने ही छपवाया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में किताबों की नकली छपाई पर अंकुश लगाने के लिए अब क्यूआर कोड की मदद ली जाएगी। अब कोई निजी प्रकाशक भले ही हूबहू इन किताबों की नकल उतार दें, लेकिन क्यूआर कोड की नकल नहीं उतारी जा सकती है, इसलिए हर मुद्रक और प्रकाशकों के माध्यम से पाठ्य पुस्तकों की मुद्रित प्रतियों के लिए 10 जून तक जिन किताबों के सैंपल तैयार किए हैं, इनकी प्रेस का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। पुस्तकों की विभिन्न गड्डियों में से रैंडम आधार पर कोई पुस्तक निकाल कर पाठ्यक्रमों की विषय वस्तु का परीक्षण किया जाएगा। यदि किताबों में कोई कमी नहीं मिलती है तो आगे की किताबें छापने के निर्देश दिए जाएंगे। सत्यापन के बाद ही किताबें स्कूल को भेजी जाएंगी। इसके अलावा इस बार किताबें चार रंग में छापी जा रही हैं। इसमें गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया है। कक्षा आठवीं की गणित की किताब दो रंग में मिलेगी।
हालांकि विषय वस्तु में कोई भी बदलाव नहीं होगा। इसके अलावा बाकी सभी किताबें भी एक से अधिक रंगों में छपवाई जाएंगी। खंड शिक्षाधिकारी राजलक्ष्मी पांडे ने बताया कि विभाग को शिकायत मिली की कि कई निजी प्रकाशक परिषद की किताबों की नकली प्रति छपवाकर बेच रहे हैं। इसके बाद विभाग ने कक्षा एक से आठ तक की किताबों पर बार कोड लगाया है। कुछ विषयों की किताबों के नमूने जांच के लिए एडी बेसिक कार्यालय भेजे हैं। इनमें कलरव.1ए कलरव.2 और कलरव.3 किताब में अंदर के पन्नों पर कई जगह क्यूआर कोड लगाया है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही किताब और उसके प्रकाशक संबंधी सभी जानकारी मिल जाएगी।