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गोमती का स्रोत ढूंढने के फिर होंगे प्रयास

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गोमती का स्रोत ढूंढने के फिर होंगे प्रयास
सीडीओ ने भूगर्भ विभाग को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
गोमती नदी की अविरल धारा बहाने के लिए प्रशासन ने नदी की खुदाई के साथ-साथ इसका प्राकृतिक स्रोत खोजने के प्रयास किए थे। डीएम के बुलावे पर रिमोर्ट सेसिंग के वैज्ञानिकों ने माधोटांडा पहुंचकर अध्ययन भी किया था लेकिन प्राकृतिक स्रोत नहीं मिला। अब सीडीओ ने भूगर्भ जल वैज्ञानिकों को पत्र लिखा है जिसमें गोमती की अविरल धारा बहाने को प्राकृतिक स्रोत खोजने की जरूरत बताई है।
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माधोटांडा स्थित गोमती नदी का अस्तित्व एक तालाब के रूप में सिमट कर रह गया था। मान्यताओं के अनुसार कभी यह नदी माधोटांडा से जिले के 16 गांव में होती हुई शाहजहांपुर के रास्ते लखनऊ पहुंचती थी। लखनऊ में भव्य रूप में बहते हुए अंत में वाराणसी पहुंचकर गंगा में मिलती है। इस नदी को पुनर्जीवित करने के लिए करीब दो माह पूर्व प्रयास शुरू किए थे। अभियान के तहत नदी क्षेत्र को मनरेगा से खुदवाया जा रहा है साथ ही हरदोई ब्रांच से निकली नहरों के माध्यम से उद्गम स्थल तक पानी पहुंचाया जा रहा है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि नदी हमेशा प्राकृतिक स्रोत से बहती है। कहीं से लाकर पानी डालकर तो नहर बहाई जा सकती है। इसके लिए जिला प्रशासन ने गोमती के प्राकृतिक स्रोत तलाशने की कवायद शुरू की थी। डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा की पहल पर एक सप्ताह पूर्व रिमोर्ट सेसिंग के दो वैज्ञानिक गोमती उद्गम स्थल पहुंचे थे। दोनों वैज्ञानिकों ने स्थानीय अधिकारियों के साथ गोमती उद्गम स्थल से लेकर जिले की सीमा तक नदी क्षेत्र का भ्रमण कर अध्ययन किया और सेटेलाइट नक्शे के माध्यम से जलस्रोत की तलाश की। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों को नदी क्षेत्र में जमीन के अंदर कई जगह पानी तो मिला लेकिन यह प्राकृतिक स्रोत नहीं था। हालांकि वैज्ञानिकों ने अभी रिपोर्ट नहीं दी है लेकिन अब सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने गोमती का प्राकृतिक स्रोत तलाशने को पुन: कवायद शुरू की है। सीडीओ ने बताया कि इसके लिए भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता के लिए पत्र लिखा गया है। विभागीय अधिकारी यहां आकर प्राकृतिक जल स्रोत का पता लगाएंगे। प्राकृतिक स्रोत न मिलने तक नहर से पानी देकर गोमती से अविरल धारा बहाई जाएगी।
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