पीलीभीत/ घुंघचाई। अवध नगरी समेत 14 शहरों के लिए लाइफलाइन कही जाने वाली गोमती नदी का दम लगातार घुट रहा है। गोमती की अविरल धारा बनाए रखने की योजना धनाभाव में परवान नहीं चढ़ सकी। उपेक्षा व किसानों द्वारा नदी पर किए जा रहे अतिक्रमण के चलते यह नदी विलुप्त होने के कगार पर है। कुछ स्थानों पर तो यह पौराणिक नदी मात्र के लकीर के रूप में दिखाई देने लगी है।
गोमती मूलत: भूजल पर आधारित नदी है। नदी का मुख्य स्रोत माधोटांडा की फुलहर झील है। इसके अस्तित्व व प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने को अरसे से लंबी चौड़ी घोषणाएं होती चली आ रही हैं। उद्गम स्थल से लेकर 17 किमी तक नदी की भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जा कर खेती करना शुरू कर दिया। मामला कोर्ट में होने के चलते जिला प्रशासन भी कब्जा हटाने में लाचारी जता रहा है। इसके चलते गोमती कहीं झील तो कहीं नाले का रूप लेती जा रही है। पूर्व में कई बार गोमती की सफाई को लेकर शोर काफी मचता रहा, लेकिन कुछ दिन नेम फेम कमाने के बाद लोग अपने उद्देश्यों को भूल गए।
अविरल धारा बहाने की मुहिम भी पड़ गई ठंडी
गोमती उद्गम स्थल से लखनऊ तक नदी की अविरल धारा बहाने को करीब आठ साल पहले शासन ने फरमान जारी किया था। उस दौरान तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा ने सिंचाई विभाग, बाढ़ खंड व भूमि संरक्षण विभाग से अलग-अलग प्रोजेक्ट भी तैयार कराए। इसके बाद उद्गम स्थल से लेकर शाहजहांपुर की सीमा तक 15 ग्राम पंचायतों को गोमती नदी की खुदाई का कार्य सौंपा गया। इस कार्य के लिए 4.45 करोड़ रुपये का इस्टीमेट तैयार किया गया। प्रत्येक पंचायत के खातों में कुछ धनराशि भी भेजी गई। पंचायतों ने मनरेगा के तहत नदी के चौड़ीकरण को खुदाई कार्य भी कराया, लेकिन पूरा बजट आवंटित न होने के कारण कार्य रोक दिया गया।
इन विभागों को स्वीकृत हुई थी धनराशि
तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा ने पूरे प्रोजेक्ट का कार्य किसी एक विभाग को न देकर तीन विभागों को सौंपा था। जिसमें जीरो किमी से 6.4 किमी तक 130.86 लाख बाढ़ खंड को, 6.4 से 39.6 किमी तक 240 लाख रुपये खंड विकास पूरनपुर को व 39.6 से 47.1 किमी तक भूमि संरक्षण विभाग द्वारा 70 लाख की लागत से कार्य कराना था। जिसमें सर्वाधिक 33.2 किमी कार्य पूरनपुर ब्लॉक की आठ ग्राम पंचायतों द्वारा कराया जाना स्वीकृत हुआ था।
इन आठ ग्रामपंचायतों को स्वीकृत हुई थी धनराशि
ब्लॉक क्षेत्र की आठ ग्राम पंचायतों को गोमती नदी की अविरल धारा बहाने के प्रयास को लेकर आठ ग्राम पंचायतों को धनराशि स्वीकृत हुई थी। जिनमें उदयकरनपुर को 8.64 लाख, शेरपुर मकरंदपुर को 26.44 लाख, कल्यानपुर को 11.84 लाख, शाहबाजपुर को 61.37 लाख, गोपालपुर को 74.37 लाख, माधौटांडा को 40.91 लाख, रंपुरा फकीरे को 17.63 लाख, गुलड़िया को 3.55 लाख की धनराशि आवंटित हुई थी। खास बात यह रही कि मनरेगा के तहत मजदूरों से कार्य तो करा लिया गया, लेकिन अधिकांश मजदूरों को उनकी मजदूरी तक नहीं मिली। रोजगार सेवकों का कहना था कि ग्राम पंचायतों के खातों में पूरी धनराशि को नहीं भेजा गया था। जिसके चलते मजदूरों को भुगतान नहीं किया।
एक हजार किमी का सफर तय करती है गोमती
माधौटांडा से निकलकर गोमती नदी घाटमपुर, शाहबाजपुर, बंडा, खुटार, गुटैया, औरंगाबाद, सीतापुर, लखनऊ से सुल्तानपुर, जौनपुर आदि जिलों से होते हुए गाजीपुर के निकट गोमती गंगा में मिल जाती है। कुल मिलाकर यह नदी करीब एक हजार किलोमीटर का सफर तय करती है। जिले में यह नदी करीब 33 गांवों से होकर गुजरती है।