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नहाय खाय के साथ बिखरेगी पूर्वांचल की छटा

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पीलीभीत।
भगवान सूर्य देव के प्रति भक्तों की अटल आस्था का अनूठा पर्व छठ पूजा 24 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। पर्व को लेकर यहां रह रहे पूर्वांचल के लोगों ने तैयारियां भी शुरू कर दी है। घरों में रंगाई-पुताई का कार्य चल रहा है।
शहर की रेलवे कॉलोनी में पूर्वांचल के करीब 60 से अधिक परिवार वर्षों से निवास करते हैं। यहां रहने वाले लोग अपने पारंपरिक त्योहारों को हर साल उत्साहपूर्वक मनाते हैं। सूर्र्य उपासना का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा यहां धूमधाम से मनाई जाती है। दिवाली के ठीक छह दिन बाद मनाए जाने वाले इस महाव्रत के दौरान लोग पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल पाने की कामना के साथ यह पर्व मनाते हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पर्व की तैयारियां तेजी से शुरू कर दी गई हैं। रेलवे स्टेशन के पूर्वी गेट के समीप स्थित जलाशय में पूजा-पाठ की रस्म अदा की जाती है। इस जलाशय को साफ सुथरा कर इसे सजाने संवारने का काम शुरू हो गया है।
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ऐसे मनाया जाएगा छठ पर्व
छठ महापर्व में षष्ठी माता व भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए स्त्री-पुरुष दोनों ही व्रत रखते हैं। चार दिवसीय पर्व के तहत 24 को नहाय खाय से कार्यक्रम शुरू होगा। इस दिन श्रद्धालु स्नान करने के बाद पूजन करके शाम को गुड़ व नए चावल की खीर बनाकर फल व मिष्ठान से छठी माता की पूजा करेंगे। 25 को खरना के साथ 24 घंटे के व्रत की शुरूआत होगी। 26 को व्रतधारी जलाशय पर पहुंचकर अस्त होते सूर्य का संध्या अर्द्ध देंगे। पर्व के अंतिम दिन यानि 27 को श्रद्धालु भोर होने से पूर्व ही पकवान, नारियल, केला, मिठाई आदि लेकर जलाशय पर एकत्र होंगे और उगते सूर्य को ऊषा अर्द्ध देंगे। इसी दिन व्रत का परायण होगा।
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महाव्रत को पूरा करने पर आती है खुशहाली
आयोजक समिति के संदीप कांती बताते हैं कि छठ पर्व को लेकर तैयारियां चल रही है। जलाशय को भी पूजा-पाठ के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां कॉलोनी के अलावा शहर के लोग भी पूजन करने पहुंचते हैं। पूर्वाचंलवासियों में यह पर्व सबसे बड़ा माना जाता है। मान्यता है कि यदि महाव्रत को विधि विधान से पूरा करता है तो परिवार में खुशहाली व मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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