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युद्ध के बीच यूक्रेन में फंसे दंपति समेत जिले के दस लोग

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पीलीभीत। जिले के दंपती और आठ विद्यार्थियों समेत दस लोग यूक्रेन में फंसे हुए हैं। परिजन चिंता में हैं। भारत सरकार के संपर्क में हैं। वहीं फंसे हुए लोग पोलैंड के रास्ते यूक्रेन से भारत आने के लिए प्रयास कर रहे हैं। यहां पर प्रार्थनाओं और दुआओं का सिलसिला चल रहा है।
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यह लोग हैं फंसे
अशोक कॉलोनी के मूल निवासी सत्यम सब्बरवाल एमबीबीएस करने यूक्रेन के टरनोपिल शहर गए थे। एमबीबीएस का चौथा वर्ष है। पिता नीरज सब्बरवाल और मां कौशल सब्बरवाल बरेली में रहते हैं। सगे ताऊ किराना व्यापारी नवीन कुमार अग्रवाल अशोक कालोनी में ही रहते हैं। छात्रों में मझोला निवासी सार्थक सक्सेना, गांव तिरकुनिया सरैनी निवासी नसीर मलिक बरेली में पासपोर्ट अधिकारी का बेटा मोहम्मद सैफ, गांव करघैना निवासी सुखवीर सिंह का पुत्र साहब सिंह, मोहल्ला देशनगर निवासी कुश कुमार वर्मा की बेटी अनमोल वर्मा, पूरनपुर के मोहल्ला साहूकारा निवासी राइस मिलर अजीम खां का पुत्र हैदर खां शामिल हैं। हजारा क्षेत्र के गांव मोरनिया गांधीनगर निवासी प्रदीप शुक्ला का पुत्र हर्षित शुक्ला, पीलीभीत की वसुंधरा कॉलोनी निवासी अंशुल गुप्ता फंसे हैं।
सेहरामऊ उत्तरी के गांव भोपतपुर निवासी बलजीत सिंह (22) अपनी पत्नी मंदीप कौर के साथ तीन महीने पहले यूक्रेन गया था। बलजीत यूक्रेन में जॉब करते हैं।
हम सब एक साथ थे आठ लोग........ पूरी रात बंकर में बिताई पर नींद नहीं आई
पीलीभीत। अशोक कॉलोनी के मूल निवासी सत्यम सब्बरवाल एमबीबीएस करने यूक्रेन के टरनोपिल शहर गए थे। एमबीबीएस का चौथा वर्ष है। उनके पिता नीरज सब्बरवाल और मां कौशल सब्बरवाल बरेली में रहते हैं। सगे ताऊ किराना व्यापारी नवीन कुमार अग्रवाल अशोक कॉलोनी में ही रहते हैं। गुरुवार को दोपहर नवीन अग्रवाल ने वीडियोकॉल करके सत्यम का हाल लिया। जब सत्यम ने रात का मंजर बयान किया तो उसे सुन कर उनकी आंखों में आंसू आ गए। लेकिन पल भर में आंसू पोंछे और भतीजे से बोले-- बेटा घबराना नहीं, तुम जल्दी घर आ जाओगे, मुझे यकीन है।
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बातचीत के दौरान बताया, फ्लाइट 22 फरवरी की थी लेकिन हवाई अड्डे से वापस लौटना पड़ गया क्योंकि कोरोना वैक्सीन का बार कोड स्कैन नहीं हो सका था। इसके बाद 28 फरवरी की टिकट हुई है। तब से लेकर अब तक एक एक पल खतरे में बीत रहा है। सत्यम ने शुक्रवार को दोपहर बताया कि बुधवार की रात बंकर में बिताई पर नींद बिल्कुल नहीं आई। वहां पर शहर की बिजली बंद कर थी। उन्हें पहले ही समझा दिया गया था कि कब बंकर में जाना है और कब बाहर आना है। बुधवार रात 11 बजे एक मिनट का सायरन बजा। उसका मतलब था कि सभी लोग फ्लैट को छोड़कर निकट के बंकर में पहुंच जाएं। हम आठ लोग इंडियन थे अपने-अपने फ्लैट से निकले और साथ-साथ बंकर में पहुंचे। सर्दी बहुत थी। तापमान शून्य से नीचे था। अपनी जैकेट पहनी, कंबल ओढ़ा तो भी सर्दी दूर नहीं हो रही थी। रोशनी के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। करीब पंद्रह मिनट चले और फ्लैट से एक डेढ़ किलोमीटर दूर बंकर में पहुंच गए। बंकर जमीन से करीब पंद्रह फीट नीचे जमीन के भीतर था। वहां सर्दी और अधिक थी। खाने के लिए बिस्कुट और पीने के लिए पानी ले गए थे पर न खाने का मन हो रहा था। न पानी पीने का। एक-एक पल यही सोच रहे थे कि कैसे निकलें और अपने देश भारत पहुंचे। जाने से पहले ही हमें बताया गया था कि अगर एक मिनट का सायरन बजता है तो तत्काल बंकर की ओर जाना है अगर दो तीन सेकेंड का सायरन बजता है तो फिर बंकर से बाहर आना है। एक मिनट का सायरन बजने पर बुधवार को रात 11 बजे हम सब बंकर में गए। रात एक बजे दो तीन सेकेंड के सारयन ने संकेत दिया तो फिर बंकर से निकले। फ्लैट की तरफ चल दिए। पूरी रात इसी में गुजर गई। बुधवार को रात से सुबह तक फ्लैट में हैं। पल-पल घर वालों से वीडियो काल पर बात हो रही है। पोलेंड के रास्ते इंडिया आने के प्रयास में वह लगे हुए हैं।
सार्थक बोला.. मम्मी पापा.......... आप चिंता न करें, मैं सुरक्षित हूं
मझोला (पीलीभीत)। मझोला निवासी सार्थक सक्सेना एमबीबीएस तृतीय वर्ष का छात्र है। पिता सुधांशु मोहन सक्सेना ने बताया 2019 में प्रवेश लिया था। बेटा अगस्त 2021 में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन के टरनोपिल शहर में गया था। उन्होंने बेटे की वापसी के लिए सरकार से टवीट् कर गुहार लगाई है। वे बेटे की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं। वहीं बेटे ने शुक्रवार को दोपहर व्हाट्स एप कॉल पर कहा- मम्मी पापा... आप चिंता न करें। मैं सुरक्षित हूं और कैब करके पोलेंड के लिए निकल रहा हूं। पोलैंड पहुंच के आप से बात करता हू। आप चिंता न करें।
सार्थक सक्सेना ने परिजन को फोन से बताया की अब युद्ध में यूक्रेन में रेड अर्लट होने के कारण डर का माहौल बन गया है। वह यूनिवर्सिटी के हॉस्टल के कमरे के अंदर ही रह रहे हैं। वहीं से भारतीय दूतावास के संपर्क में है मगर कोई भी मदद नहीं मिल रही है। कोराना काल के कारण घर से ही आनलाइन पढ़ाई की थी। अगस्त 2021 में पढ़ाई के लिए गया था। फोन पर हुई बात में सार्थक सक्सेना ने बताया कि यूक्रेन का टरनोपिल शहर है। जहां से पड़ोसी देश पोलैंड की सीमा है। कार द्वारा चार घंटे का सफर कर पोलैंड पहुंचा जा सकता हैै। पोलैंड ने दूसरे देशों के छात्रों व अन्य लोगों को हमले से बचाने के लिए राहत देने का कार्य किया है। सार्थक ने बताया कि पोलैंड की सीमा पर पहुंचने पर वहां की सरकार 14 दिन का तत्काल वीजा देना शुरू किया है।
बंद हो सकता है व्हाट्स एप नेटवर्क, इसलिए दिया यूक्रेन का नंबर
सार्थक ने बताया कि हमले की स्थिति होने के कारण वहां के नेटवर्क पर भी प्रभाव पड़ सकता है, हो सकता है कि व्हाट्सएप से संपर्क न हो तो सार्थक ने अपने परिजन को यूक्रेन का मोबाइल नंबर भी भेज दिया है। यह भी कहा कि जैसी भी स्थिति हो मैं आप लोगों को आईएसडी काल करके बताता रहूंगा।
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