पीलीभीत। जंगल से दूर अमरिया तहसील क्षेत्र में छह वर्ष पहले शुरू हुई बाघों की चहलकदमी अब ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। बाघों को आबादी वाले इलाके से दूर रखने की वन विभाग की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। हालात ये हैं कि अब बाघों को वन से ज्यादा आबादी के आसपास का इलाका रास आने लगा है। शुरू में एक-दो बाघों ने अमरिया इलाके में अपना ठौर बनाया था, लेकिन अब सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमरिया इलाके में बाघों की संख सात है। जबकि ग्रामीण इलाके में बाघों की संख्या 10 से ज्यादा बताते हैं। आबादी क्षेत्र के निकट चहलकदमी कर बाघ मवेशियों को अपना निवाला बना रहे है। बाघों की मौजूदगी से लोगों में खासी दहशत है। टाइगर रिजर्व के जंगल से दूर अमरिया क्षेत्र में वर्ष 2012 में दो बाघों की चहलकदमी देखी गई थी। इसके बाद एक-एक करके जंगल से निकलकर आबादी इलाके में बाघों की संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में उनकी 10 से अधिक हो गई है। हालांकि वन विभाग ने सात बाघों को सूचीबद्ध किया है। वन विभाग ने आबादी इलाके के बाघों को जंगल में शिफ्ट करने की योजना बनाकर मुख्यालय भेजी गई थी। बाघों की रोकथाम को कई अभियान चलाए गए, लेकिन औपचारिकता के चलते योजना सफल नहीं हो सकी। रोकथाम न होने से बाघों में सक्रियता बढ़ रही है। बाघ मवेशियों को अपना निवाला बना रहे हैं। चार दिन में अमरिया क्षेत्र में आबादी के निकट दो मवेशी बाघों का निवाला बन चुके हैं।
अमरिया तहसील क्षेत्र में चहलकदमी कर रहे बाघों पर कई टीमें नजर रख रही हैं। ग्रामीणों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है। बाघों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए टीमें क्षेत्र का दौरा कर रही हैं। इसको लेकर लगातार पत्राचार भी जारी है।
- आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व