पीलीभीत। ठेका सफाई कर्मचारियों को कम मजदूरी देेने और एक हजार रुपये की कटौती के मामले में पालिकाध्यक्ष ने कर्मचारियों के उपस्थिति संबंधी अभिलेख तलब किए हैं। साथ नियमानुसार ईपीएफ जमा न करने की जानकारी पर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
शहर की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नगर पालिका प्रशासन द्वारा करीब 249 ठेका सफाई मजदूरों से काम लिया जा रहा है। पालिका प्रशासन द्वारा इसका ठेका गत वर्ष जून में बरेली की गैलेक्सी इंटरप्राइजेज को दिया गया था। नियमानुसार इन ठेका सफाई मजदूरों को प्रतिदिन के हिसाब से 259 रुपये का भुगतान किया जाना चाहिए। इन कर्मचारियों के ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) खाते में 12 प्रतिशत धनराशि ठेका सफाई मजदूर की मजदूरी से और 13 प्रतिशत धनराशि ठेकेदार द्वारा ईपीएफ खाते में जमा की जानी थी। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा जून से लेकर अब तक ईपीएफ खाते में धनराशि नहीं जमा की गई। जबकि ठेकेदार को ईपीएफ खाते में धनराशि जमा करने के बाद ही अगले माह का भुगतान किए जाने के निर्देश थे। इस सबके बावजूद ठेकेदार को लगातार हर माह भुगतान किया जा रहा है। इधर ठेकेदार को नवंबर माह का 20,94737 रुपये का भी भुगतान कर दिया। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा 21 जनवरी को सफाई मजदूरों के खातों में धनराशि डाली गई तो अधिकांश सफाई मजदूरों के खातों में कम मजदूरी के साथ एक-एक हजार रुपये कटौती होने का मामला प्रकाश में आया। जानकारी पर सफाई मजदूरों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपकर ठेका निरस्त कर मामले की जांच कराकर मानदेय दिलाने की मांग की थी। इधर बुधवार को पालिकाध्यक्ष विमला जायसवाल नगर पालिका में पहुंची। यहां पहुंचकर उन्होंने ठेका सफाई मजदूरों को कम मजदूरी मिलने और एक हजार रुपये की कटौती के मामले में नाराजगी जताई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से सफाई मजदूरों के हाजिरी से संबंधित अभिलेख तलब किए। पालिकाध्यक्ष ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। इस मामले की जानकारी की जा रही है। ईपीएफ और भुगतान आदि को लेकर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।