रेलवे बोर्ड के आला अफसर यात्रियों को ट्रेनों की लेट-लतीफी से बचाने के लिए भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही है।
तो ये माजरा है
असल में ट्रेनों के गार्ड और ड्राइवरों के बक्से उन तक नियत समय में न पहुंच पाने की वजह से लखनऊ रेलवे स्टेशन पर ज्यादातर गाड़ियां घंटों खड़ी रहती हैं। आए दिन गार्ड व ड्राइवरों के बक्से न पहुंचने के कारण ट्रेनें 30 से लेकर 45 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रह जाती हैं।
सिग्नल के बाद भी रुक जाती हैं गाड़ियां
जून में 51 ट्रेनें बक्से के इंतजार में देर तक खड़ीं रहीं। सिग्नल मिलने के बावजूद ट्रेनों के पहिए न हिलने के कारण उसमें बैठे यात्री परेशान हो जाते हैं। रेलवे की इस लापरवाही से दैनिक यात्री सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। वह अपने गंतव्य तक वक्त पर नहीं पहुंच पाते हैं। इस कारण आए कई ट्रेनों के दैनिक यात्रियों को हंगामा करना पड़ता है।
कामचलाऊ व्यव्स्था
उत्तर रेलवे लखनऊ के सीनियर डीएमआई (ओएंडएफ) संदीप मुखर्जी का कहना है कि ठेकेदार के पास काम करने वाले कर्मचारी अचानक नौकरी छोड़ देते हैं। ऐसे में वह किसी तरह लोगों की व्यवस्था कर काम चलाता है।
पहली बार बक्सा देरी होने पर 500, दूसरी बार में 1000 और तीसरी बार में 1500 रुपए का जुर्माना लिया जाता है।