उत्तर प्रदेश के बारह जनपदों में दीपावली के मौके पर उल्लुओं को तंत्रमंत्र के लिए मारा जा रहा है। इसके अलावा कई जिले हैं, जहां उल्लुओं का शिकार विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
‘ट्रैफिक इंडिया’ ने सर्वेक्षण के बाद यह रिपोर्ट प्रकाशित की है। इससे वन मुख्यालय में खलबली मची हुई है। वन्य जीव प्रमुख वन संरक्षक ने इस रिपोर्ट के हवाले से प्रदेश भर के वन अधिकारियों को अलर्ट किया है। बलि और शिकार को रोकने के लिए पहरेदारी की हिदायत दी गई है।
साथ ही ऐसा करने वालों को थानों में बंद करने का आदेश जारी हुआ है। उल्लुओं के कारोबार की बात तो पुरानी है लेकिन उनकी बलि किस जिले में दी जा रही है और कौन सी प्रजाति का शिकार हो रहा है, उसका नाम पहली बार उजागर किया गया है।
प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे ने इस आशय की जानकारी देते हुए बताया है कि ट्रैफिक इंडिया के ‘इंपीरिल्ड कस्टोडियंस ऑफ नाइट’ रिपोर्ट में विस्तृत अध्ययन है, जिससे जाहिर होता है कि उल्लुओं की संख्या क्यों लुप्त प्राय हो गई है।
देश में उत्तर प्रदेश में ही सर्वाधिक उल्लुओं का शिकार होता है। तंत्र-मंत्र क्रिया में इसका प्रयोग हो रहा है। डे ने वन आफिसरों को ताकीद किया है कि इसके लिए प्रशासन, पुलिस, जीआरपी, एनजीओ और वन्य प्रेमियों का सहयोग लेकर व्यापक अभियान भी चलाया जाए।
वन संरक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि चेकिंग की जा रही है। कहीं उल्लू की खरीद फरोख्त तो नहीं हो रही, यह भी देखा जा रहा है। मंडल भर में टीमों को लगा दिया गया है।
इन जनपदों में किया जा रहा शिकार
लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, मुरादाबाद, कानपुर, इलाहाबाद, झांसी, उन्नाव, हरदोई, रायबरेली, उरई व पीलीभीत।