सूबे में कन्या विद्या धन के लिए आवेदन करने वाली बेटियों की संख्या को देखते हुए सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में बारहवीं पास डेढ़ लाख और छात्राओं को 30 हजार रुपये देने की कवायद शुरू कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कन्या विद्या धन योजना के जिलेवार लक्ष्य में बढ़ोत्तरी कर 450 करोड़ रुपये का और प्रावधान किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री को भेज दिया है।
सरकार अब तक कन्या विद्या धन बांटने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग को 440 करोड़ रुपये भुगतान कर चुकी है। योजना के लिए निर्धारित मानक में सालाना 35 हजार रुपये आय वाले परिवार और 2012 में बारहवीं पास करने वाली छात्राओं को आवेदन के लिए पात्र घोषित किया गया था। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानक एवं अंतिम तिथि 20 सितंबर तक 6.75 लाख से ज्यादा छात्राओं ने कन्या विद्या धन के लिए आवेदन किया था।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सरकार द्वारा आवंटित बजट के आधार पर महज 1.35 लाख छात्राओं को कन्या विद्या धन देने का लक्ष्य निर्धारित किया। ऐसे में निर्धारित मानक के आधार पर बड़ी संख्या में पात्र छात्राओं के योजना से वंचित होने की सूचना जिलों से मिलने के बाद सरकार लक्ष्य बढ़ाने का निर्णय लिया है।
जिलों से माध्यमिक शिक्षा विभाग को भिजवाई गई सूची के अनुसार जिलेवार निर्धारित लक्ष्य की तुलना में सर्वाधिक पांच से दस गुणा ज्यादा पात्र छात्राएं लखनऊ, इलाहाबाद, आजमगढ़, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सहारनपुर, गोरखपुर, आगरा, मुरादाबाद, उन्नाव, फैजाबाद, अम्बेडकर नगर, सुल्तानपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, मऊ, वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर और प्रतापगढ़ में योजना के लाभ से वंचित हो रही हैं। ऐसे में सभी जिलों के लक्ष्य में बढ़ोत्तरी करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया है।
बता दें कि 17 सितंबर को जारी शासनादेश में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सालना 35 हजार रुपए आय वाले या फिर गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बीपीएल) परिवार की सर्वाधिक अंक पाने वाली छात्राओं को कन्या विद्याधन देने का जिलेवार लक्ष्य निर्धारित किया था।
इसके बाद 27 सितंबर को झांसी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव योजना का शुभारंभ करने के बाद एक दर्जन जिलों में जाकर छात्राओं को कन्या विद्याधन का चेक बांट चुके हैं। इस दौरान कई जिलों में मुख्यमंत्री को योजना से वंचित छात्राओं का विरोध भी झेलना पड़ा। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने लक्ष्य में बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया है।