निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गा नागपाल मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने और कठोर रुख अख्तियार कर लिया है। इस मुद्दे पर चारों तरफ से हो रहे हमले का जवाब उन्होंने आक्रामक शैली में दिया।
उन्होंने कहा कि नागपाल के निलंबन पर सरकार के नीति व निर्णय पर अंगुली उठाने वालों को वह दौर नहीं भूलना चाहिए, जब मुख्यमंत्री के कमरे में जाने के लिए अफसरों को अपने जूते उतारने पड़ते थे। पंचम तल जाने में पैर कांपते थे।
वह सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर स्व. जनेश्वर मिश्र ‘छोटे लोहिया’ की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने सोमवार की सुबह ‘अमर उजाला’ के प्रतिभा सम्मान समारोह में कहा कि अफसर गलती करेंगे तो सजा मिलेगी ही।
उन्होंने शिकवा करते हुए कहा कि वह मीडिया का काफी सम्मान करते हैं लेकिन मीडिया का एक वर्ग हमारे पीछे पड़ा है।
पुरानी बातें याद रखनी चाहिए:
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गलती करे तो आलोचना होनी चाहिए। पर, अकारण आलोचना हो रही है। पिछली बसपा सरकार ने क्या-क्या नहीं किया। तब एक आईएएस अधिकारी आत्महत्या को मजबूर हुआ और अधिकारियों को अपमान तथा उत्पीड़न झेलना पड़ता था। पंचम तल जाने की बात होते ही अफसरों के पैर कांपने लगते थे।
लोकतंत्र बसपा सरकार के हाथों बंधक बन गया था। समाजवादी पार्टी ने लोकतंत्र को बहाल किया। आज अफसर पूरी स्वतंत्रता से इधर-उधर घूम रहे हैं। किसी पर कोई बंदिश नहीं है। अधिकारी सरकार के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी देखना है कि प्रदेश में शांति कैसे रहेगी। कोई अधिकारी गलती करे तो क्या उसे सजा भी न दी जाए। आज सरकार के उचित फैसलों पर भी उंगली उठाई जाती है।