प्रदेश की तकनीकी शिक्षा का ब्रांड उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी (यूपीटीयू) शुक्रवार से एक बार फिर से अस्तित्व में आ जाएगी।
इसके साथ ही यूपी के 700 से ज्यादा इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, तकनीकी शिक्षण संस्थान और उनके चार लाख से ज्यादा छात्र यूपीटीयू से जुड़ जाएंगे।
महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एमटीयू) नोएडा और गौतमबुद्ध टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जीबीटीयू) लखनऊ का विलय करके यूपीटीयू बनाने की अधिसूचना शुक्रवार को जारी की जाएगी। उम्मीद है कि यूपीटीयू अब रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी के कॉन्सेप्ट पर भी काम करेगी।
दरअसल, मायावती सरकार ने 2010 में यूपीटीयू का नाम बदलकर जीबीटीयू कर दिया था, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के कॉलेज जोड़े गए थे।
साथ ही नोएडा में एमटीयू की स्थापना कर पश्चिमी यूपी के कॉलेजों को संबद्ध किया गया था। अखिलेश सरकार बनने के बाद मार्च 2013 में फिर यूपीटीयू बनाने का प्रस्ताव कैबिनेट में पास हुआ।
यूपीटीयू-2013 विधेयक विधान परिषद से प्रवर समिति गया और फिर 20 सितंबर को विधान परिषद में पास कर दिया गया।
यूपी टेक्निकल एजुकेशन के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि दोनों यूनिवर्सिटी को एक करके यूपीटीयू बनने संबंधी अधिसूचना एक नवंबर को जारी की जाएगी।
उधर, जीबीटीयू व एमटीयू के संयुक्त वीसी के रूप में सेवाएं दे रहे डॉ. आरके खांडल ही यूपीटीयू के वीसी के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
और बंद हो जाएगी एमटीयू
यूपीटीयू बनने के साथ ही शुक्रवार को एमटीयू का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। देश की उच्च शिक्षा के लिए सबसे बड़ा और एतिहासिक दिन होगा, जब किसी सरकारी यूनिवर्सिटी को समाप्त किया जाएगा।
ऐसा पहले नहीं हुआ जब कोई यूनिवर्सिटी बनाने के बाद बंद की गई हो। हालांकि सरकार इसे दो विवि का विलय कह रही है लेकिन तकनीकी रूप से इसे एक विवि का समाप्त होना ही माना जाएगा।