नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक ने रिहायश और उद्योगों में मिक्स लैंड यूज की इजाजत देकर आम आदमी को सहूलियतें तो दी हैं लेकिन जो इसका प्रयोग करेगा, उसे भारी भरकम रकम प्राधिकरण में जमा करानी होगी। नतीजतन लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।
दरअसल, औद्योगिक प्राधिकरण में मिक्स लैंड यूज का प्रावधान पहली बार लागू किया जाएगा। लखनऊ प्राधिकरण समेत अन्य में यह व्यवस्था पहले से ही है।
इसके अलावा आवासीय क्षेत्र में नीचे कमर्शियल गतिविधियां चलती हैं और उसके ऊपर रिहायश होती है। कुछ ऐसा ही नोएडा में किया गया है।
उदाहरण के तौर पर सेक्टर-19 को लें, तो यहां कामर्शियल और आवासीय रेट के बीच के अंतर का 50 फीसदी एकमुश्त जमा करना होगा। तभी कमर्शियल गतिविधियों की इजाजत होगी।
इसके लिए करीब दो से ढाई लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भुगतान करना होगा, जो करोड़ों में होगा। इसके अलावा पार्किंग की भी व्यवस्था करनी होगी, लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि जब जमीन ही नहीं बची है तो पार्किंग के लिए लोगों को कहां सुविधा दी जाएगी।
फोनरवा अध्यक्ष एनपी सिंह का कहना है कि प्राधिकरण उन्हीं स्थानों पर रिहायश में कमर्शियल गतिविधियों की इजाजत देगा, जहां पर 24 मीटर चौड़ा रोड होगा लेकिन वहां भी कितनी गाड़ियां खड़ी की जा सकेंगी।
इसकी परेशानी आसपास के लोगों को ही होगी, क्योंकि शहर में जितनी भी सड़कें हैं, वहां पहले से वाहन ही वाहन दिखाई देते हैं।
हालांकि नोएडा प्राधिकरण इससे पहले ही मिक्स लैंड यूज की इजाजत दे चुका है। सेक्टर-32 सिटी सेंटर में आवासीय, रिहायश और कमर्शियल की इजाजत आवंटन के समय ही दी गई थी।
इसी तरह आईटी कंपनियों में भी मिक्स लैंड यूज की इजाजत पहले से ही है। बिल्डरों को जब जमीन आवंटित की जाती है तो परिसर में ही सभी सुविधाओं के लिए इजाजत होती है।