देश में भले ही नवविवाहित जोड़ों को शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जागरूक किया जा रहा हो। चाहे रजिस्ट्रेशन के फायदे गिनाए जा रहे हों लेकिन शहर में इसके लिए कोई खास पहल देखने को नहीं मिली।
यही वजह है कि यहां शादियों का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए किसी तरह की मारामारी नहीं है। प्रदेश शासन की ओर से इस मामले में किसी तरह का आदेश नहीं मिलना भी बड़ी वजह है।
शहर में हर साल हिंदू रीतिरिवाजों से हजारों शादियां होने का अनुमान है लेकिन रजिस्ट्रेशन कराकर इन शादियों को कानूनी जामा पहनाने वाले बेहद कम हैं।
पिछले पांच साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इनका आंकड़ा प्रतिवर्ष केवल 700 से 900 के करीब आता है। यह आंकड़े भी नई शादियों के नहीं हैं, बल्कि कुछ साल साथ बिता चुके जोड़े भी इसमें शामिल हैं।
नई शादियों के मामले में रजिस्ट्रेशन कराने वे जोड़े आते हैं, जिनको विदेश जाना होता है क्योंकि दस्तावेज के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जरूरी है।
इस बारे में सब रजिस्ट्रार बीके यादव ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के लिए किसी तरह की मारामारी नहीं है। सप्ताह में इक्का-दुक्का लोग पंजीकरण कराने आते हैं, जब उनको प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है।
दरअसल, सरकार की ओर से इस मामले में किसी तरह का शासनादेश भी नहीं है। यहां लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य नहीं बल्कि ऐच्छिक है।
विदेश जाने पर ही आते हैं
विदेश जाने वाले नए जोड़ों को पंजीकरण के लिए विभाग का चक्कर लगाते देखा जा सकता है। ऐसे जोड़ों को जरूरी दस्तावेज के तहत विवाह प्रमाणपत्र देना होता है। लिहाजा उनको रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आना पड़ता है।
इसके अलावा वैसे लोग भी यहां रजिस्ट्रेशन कराने आते हैं, जिनको कंपनी की ओर से प्रमाणपत्र की मांग की जाती है। वहीं प्रॉपर्टी के मामले में भी कुछ लोग इस प्रमाणपत्र को रखते हैं।
शादी रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी कागजात
वर का निवास प्रमाणपत्र
शादी कहां हुई है, इसका प्रमाणपत्र
वर व वधू का जन्म प्रमाणपत्र
शादी का कार्ड या पुरोहित से जारी किया गया प्रमाणपत्र
राजपत्रित अधिकारी या नगर निगम जनप्रतिनिधि से प्रमाणित